रायबरेली। रायबरेली जिले के खीरों थाना क्षेत्र से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने अभिभावकों को बच्चों को दवा देने में सावधानी बरतने की बड़ी सीख दी है। यहां एक तीन वर्षीय बच्चे की हालत खांसी के सिरप की अधिक खुराक देने से अचानक बिगड़ गई।
परिजनों ने तुरंत उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) में इलाज के बाद अब बच्चे की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार गुरूबक्शगंज थाना क्षेत्र के गांव गढ़ीदुलाराय निवासी बिंदादीन जो गुरूबक्शगंज थाने में चौकीदार के पद पर कार्यरत हैं, शुक्रवार को अपनी पत्नी और तीन वर्षीय बेटे विनय के साथ खीरों थाना क्षेत्र के नोनैरा गांव स्थित अपने ससुराल आए हुए थे। परिवार वहां एक शादी समारोह में शामिल होने आया था।
इसी दौरान बच्चे विनय को अचानक खांसी और जुकाम की शिकायत होने लगी। बच्चे की परेशानी को देखते हुए पिता बिंदादीन पास के बनईमऊ बाजार में स्थित एक मेडिकल स्टोर से खांसी का सिरप लेकर आए। रात में उन्होंने बच्चे को डॉक्टर की सलाह के बिना ही सिरप की एक खुराक पिला दी।
शुरुआत में लगा कि बच्चे को आराम मिल जाएगा, लेकिन रात में ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। अगले दिन सुबह बच्चे की खांसी जारी रहने पर परिजनों ने थोड़े-थोड़े अंतराल पर दो बार और सिरप पिला दिया। दवा की यह अतिरिक्त खुराक बच्चे के लिए नुकसानदेह साबित हुई।
कुछ ही देर बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ने लगी। बच्चा सुस्त पड़ने लगा और उसकी तबीयत देखकर परिजन घबरा गए। स्थिति गंभीर होती देख परिवार तुरंत बच्चे को लेकर खीरों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचा।
सीएचसी की इमरजेंसी में मौजूद डॉ. सुनील यादव ने बच्चे का तत्काल इलाज शुरू किया। जांच के बाद डॉक्टर को पता चला कि बच्चे को डेक्सट्रोमैथोर्फन (Dextromethorphan) युक्त खांसी का सिरप दिया गया था और उसकी खुराक जल्दी-जल्दी दे दी गई थी, जिससे बच्चे की हालत बिगड़ गई।
डॉक्टर सुनील यादव ने बच्चे को प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जिला अस्पताल में बच्चे को पीडियाट्रिक आईसीयू (PICU) में भर्ती कर लिया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज किया गया।
बच्चे के पिता बिंदादीन ने बताया कि जिला अस्पताल में इलाज के बाद अब उनके बेटे की हालत में काफी सुधार है और डॉक्टरों ने उसे खतरे से बाहर बताया है। उन्होंने कहा कि यह घटना उनके परिवार के लिए बहुत डरावनी रही और अब वह बिना डॉक्टर की सलाह के बच्चे को कोई भी दवा नहीं देंगे।
सीएचसी के डॉक्टर सुनील यादव ने बताया कि बच्चे की तबीयत खांसी के सिरप की अधिक खुराक के कारण बिगड़ी थी। वही डॉक्टर मनोज मिश्रा बताया कि डेक्सट्रोमैथोर्फन खांसी के इलाज में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दवा है और यह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसकी सही मात्रा और अंतराल का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।
डॉक्टरों का कहना है कि छोटे बच्चों को किसी भी दवा की खुराक डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं देनी चाहिए। कई बार माता-पिता यह सोचकर दवा बार-बार दे देते हैं कि इससे बच्चे को जल्दी आराम मिलेगा, लेकिन इससे उल्टा नुकसान हो सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के शरीर में दवाओं का असर वयस्कों की तुलना में अलग तरीके से होता है। इसलिए किसी भी दवा की मात्रा तय करते समय बच्चे की उम्र और वजन को ध्यान में रखना जरूरी होता है।
इस घटना के बाद डॉक्टरों ने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों को खांसी, बुखार या किसी भी बीमारी में दवा देने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। बिना चिकित्सकीय सलाह के बार-बार दवा देने से बच्चों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है।
यह घटना अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी है कि दवाएं तभी लाभकारी होती हैं जब उन्हें सही मात्रा और सही तरीके से दिया जाए। थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।


















