रायबरेली का बघौला गौशाला बना ग्रामीणों की कमाई का जरिया, 360+ गौवंश की बेहतर देखभाल

रायबरेली। सलोन क्षेत्र स्थित बघौला गौशाला अब सिर्फ गौवंश संरक्षण का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है। सूची चौकी क्षेत्र में स्थित इस गौशाला में जहां एक ओर सैकड़ों गौवंशों की समुचित देखभाल हो रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय किसानों के लिए आय का नया स्रोत भी तैयार हो गया है।

जमीनी पड़ताल में सामने आया कि गौशाला में 360 से अधिक गौवंशों के भरण-पोषण की व्यवस्थित व्यवस्था है। हरे चारे और बाजार से मिलने वाले पशु आहार की नियमित आपूर्ति के चलते पशु स्वस्थ और सक्रिय नजर आए। यहां करीब आधा दर्जन कर्मचारी दिन-रात देखरेख में लगे हैं, जिससे व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।

गौशाला में बड़े पैमाने पर भूसे का भंडारण किया गया है, जो भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आसपास के किसानों के लिए आय का जरिया बन रहा है। स्थानीय किसान यहां हरा चारा और भूसा बेचकर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं, जिससे यह केंद्र ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों से सीधे तौर पर जुड़ गया है।

पशुओं के उपचार को लेकर भी यहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है। घायल गौवंशों के लिए अलग सुरक्षित स्थान बनाया गया है, जहां उनका उपचार कर उन्हें मच्छरदानी से ढककर रखा जाता है। वहीं किसी गौवंश की मृत्यु होने पर पंचायतनामा और दफन की पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत की जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।

ग्राम विकास अधिकारी मनीष कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, बरसात के मौसम को देखते हुए गौशाला परिसर में खड़ंजा निर्माण कराया जा रहा है, ताकि जलभराव और कीचड़ की समस्या से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि नियमित निरीक्षण के साथ-साथ मिलने वाले सुझावों पर भी अमल किया जा रहा है।

बघौला गौशाला की यह पहल यह संकेत देती है कि योजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन हो तो गौसंरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी जा सकती है।

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