- डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर आयोजित 59वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा संपन्न, बुजुर्गों और महिलाओं की बड़ी भागीदारी
शकील अहमद
लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर आयोजित 59वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा श्रद्धा, सेवा और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण बनकर सफलतापूर्वक संपन्न हुई। उसरी तिराहा, बंगला बाजार, सरोजनीनगर से रवाना हुई इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्रीरामलला, हनुमानगढ़ी तथा अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन किए।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला। भक्ति के माहौल के बीच श्रद्धालुओं ने सरयू स्नान कर पूजा-अर्चना की और प्रभु श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त किया।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि “राम केवल आस्था नहीं, बल्कि भारत की आत्मा हैं। सेवा ही वह मार्ग है, जो समाज को संस्कारों और संस्कृति से जोड़ता है।” उन्होंने कहा कि इसी विचार के साथ शुरू की गई रामरथ यात्रा आज सरोजनीनगर क्षेत्र में सामाजिक चेतना और आध्यात्मिक जागरण का एक महत्वपूर्ण अभियान बन चुकी है।
माताजी की स्मृति में शुरू हुई थी यात्रा
रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा की शुरुआत 27 सितंबर 2022 को डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपनी स्वर्गीय माताजी श्रीमती तारा सिंह की पुण्य स्मृति में की थी। आधुनिक श्रवण कुमार की भावना से प्रेरित यह पहल वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को निःशुल्क अयोध्या धाम ले जाकर श्रीरामलला के दर्शन कराने का माध्यम बनी है।
इस यात्रा का उद्देश्य केवल तीर्थ दर्शन कराना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और बुजुर्ग सम्मान की परंपरा को मजबूत करना भी है।
150 बसों से 8,600 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे अयोध्या
डॉ. राजेश्वर सिंह के मार्गदर्शन में अब तक 150 बसों के माध्यम से 8,600 से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम पहुंचकर श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं। यात्रा में बुजुर्गों और महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही, जिसने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति के उत्सव में बदल दिया।
श्रद्धालुओं ने हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन के साथ सरयू तट पर धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग लिया।
श्रद्धालुओं की सुविधा का रखा गया विशेष ध्यान
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भोजन, जलपान, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई थी। इसके अलावा श्रद्धालुओं को धार्मिक साहित्य के रूप में गीता और प्रसाद भी वितरित किया गया।
पूरे आयोजन में सेवा भाव, अनुशासन और समर्पण की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए इसे यादगार अनुभव बताया।
संस्कृति और सामाजिक समरसता का संदेश
डॉ. राजेश्वर सिंह का मानना है कि रामरथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, सेवा और राष्ट्रधर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने के साथ-साथ समाज में सामाजिक समरसता, सेवा भाव और आध्यात्मिक चेतना को भी मजबूत कर रही है। यही कारण है कि रामरथ यात्रा आज सरोजनीनगर क्षेत्र में एक जनआस्था अभियान का रूप ले चुकी है।













