- सात बच्चों को मिला दृढ़करण संस्कार, दो बच्चों ने पहली बार ग्रहण किया प्रथम परमप्रसाद; भव्य शोभायात्रा में उमड़े श्रद्धालु
शकील अहमद
सरोजनीनगर (लखनऊ)। राजधानी लखनऊ के सरोजनीनगर स्थित संत थॉमस चर्च एवं संत थॉमस कॉलेज परिसर में पल्ली के संरक्षक संत थॉमस का वार्षिक पर्व श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक गरिमा के साथ मनाया गया। समारोह में बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय के श्रद्धालु एवं गणमान्य अतिथि शामिल हुए। पूरे आयोजन में भक्ति, अनुशासन और आध्यात्मिक वातावरण का सुंदर संगम देखने को मिला।
समारोह की अध्यक्षता श्रद्धेय बिशप स्वामी जेराल्ड जॉन मथाएस ने की। उनके नेतृत्व में धार्मिक विधि-विधानों के अनुसार विशेष प्रार्थना सभा एवं पवित्र अनुष्ठान संपन्न हुए। इस अवसर पर श्रद्धेय फा. क्लीफर्ड लोबो, फा. अरुण, फा. ऑलविन मोरेस, फा. पॉल एवं फा. सायमंड की उपस्थिति में दो बच्चों को पहली बार प्रथम परमप्रसाद ग्रहण कराया गया, जबकि सात बच्चों को दृढ़करण (कन्फर्मेशन) संस्कार प्रदान किया गया।
पर्व के दौरान संत थॉमस की प्रतिमा को आकर्षक ढंग से सुसज्जित डोली में विराजमान कर संत थॉमस कॉलेज से संत थॉमस चर्च तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों और प्रार्थनाओं के बीच पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ शोभायात्रा में भाग लिया।
समाजसेवी अरुण एंथोनी, जो प्रसिद्ध गीतकार स्वर्गीय एंथोनी दीपक के पुत्र हैं, ने संत थॉमस के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि प्रभु यीशु मसीह के पुनर्जीवित होने के बाद उनके शिष्य संत थॉमस ने उनके घावों को स्पर्श कर विश्वास किया और भावविभोर होकर कहा- ‘मेरे प्रभु, मेरे ईश्वर!’ उन्होंने कहा कि यह घटना अटूट विश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देती है।
संगीत मंडली द्वारा प्रस्तुत भक्तिमय भजनों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस प्रस्तुति को सफल बनाने में यूथ अध्यक्ष मि. पिनांक, मि. अजीत, रीना, निर्मला, कैथरीन, सिस्टर जेनिफर तथा सिस्टर सीरीन का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत ग्रीष्मा ने किया, जबकि डेविड लकड़ा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संपूर्ण आयोजन संत थॉमस कॉलेज के प्राचार्य एवं संत थॉमस चर्च के पल्ली पुरोहित श्रद्धेय फा. क्लीफर्ड लोबो के मार्गदर्शन और निगरानी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों एवं श्रद्धालुओं ने प्रीतिभोज में सहभागिता कर प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया।













