राम आस्था हैं, चुनावी नारा नहीं: डॉ. राजेश्वर सिंह का अखिलेश यादव पर निशाना

  • अखिलेश यादव के बयानों पर साधा निशाना, कहा- आस्था भाषणों से नहीं, आचरण से सिद्ध होती है

शकील अहमद

लखनऊ। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और मर्यादा के प्रतीक हैं। उनका नाम राजनीतिक सुविधा या चुनावी रणनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आस्था का प्रमाण केवल भाषणों से नहीं, बल्कि व्यक्ति के आचरण और सार्वजनिक जीवन में उसके मूल्यों के पालन से मिलता है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता भली-भांति जानती है कि जो लोग वर्षों तक श्रीराम जन्मभूमि, अयोध्या और रामभक्तों की भावनाओं के प्रति मौन या उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाते रहे, वे आज लगभग हर सार्वजनिक बयान में श्रीराम का स्मरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह परिवर्तन वास्तविक श्रद्धा और आत्मचिंतन का परिणाम है तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यदि यह केवल चुनावी मजबूरी या राजनीतिक अवसरवाद का हिस्सा है तो जनता इसे भी समझने में सक्षम है।

उन्होंने कहा कि श्रीराम का नाम लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों- मर्यादा, सत्य, सेवा, न्याय और राष्ट्रधर्म को जीवन तथा राजनीति में आत्मसात करना ही सच्ची श्रद्धा का परिचायक है। उनके अनुसार भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं और उनका जीवन समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में अयोध्या का गौरव पुनर्स्थापित हुआ है। श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण करोड़ों श्रद्धालुओं की वर्षों पुरानी आस्था और विश्वास का प्रतीक बनकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत गौरव के पुनर्जागरण का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, “राम आस्था हैं, ट्रेंड नहीं; राम मर्यादा हैं, राजनीतिक मजबूरी नहीं। जो कभी श्रीराम के विषय में मौन थे, वे आज राम-नाम का सहारा ले रहे हैं। आस्था भाषणों से नहीं, आचरण से सिद्ध होती है। राम का नाम चुनावी सीजन का नारा नहीं, बल्कि राष्ट्र की सनातन आस्था है। उत्तर प्रदेश की जनता अवसरवाद और सच्ची श्रद्धा के बीच का अंतर भली-भांति जानती है।”

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