- इण्टर पास कर रहा खून जांच, एमबीबीएस देख रहे रिपोर्ट
- कमीशन के खेल में फंसे सीएचसी के डॉक्टर मरीजों की जान से कर रहे खिलवाड़
रायबरेली। कमीशन का खेल ऐसा होता है कि इसमें एक बार फंस जाने के बाद भला-बुरा कुछ भी दिखाई नहीं देता। कमीशन का गलत पैसा इंसान की मति मार देता है। सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त होने का दावा करते हैं। इसके विपरीत खीरों सीएचसी में डॉक्टरों की मनमानी से स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी हो चुकी हैं।
इलाज के लिए अस्पताल आने वाले जरूरतमंद रोगियों को खून की महंगी जांचें बाहर से कराने के लिए बाध्य किया जाता है। आरोप है कि जिम्मेदारों की मिलीभगत से धड़ल्ले से चल रही मानकविहीन पैथोलॉजी में पैथोलॉजिस्ट और लैब टेक्नीशियन की गैरमौजूदगी में कथित रूप से जांच रिपोर्ट देकर मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है और उन्हें आर्थिक रूप से लूटा जा रहा है। आरोप यह भी है कि मानकविहीन पैथोलॉजी से अप्रशिक्षित और अयोग्य व्यक्तियों द्वारा दी जा रही जांच रिपोर्ट को कमीशन के खेल में फंसे सीएचसी के डॉक्टरों द्वारा स्वीकार किया जाता है।
सोमवार को क्षेत्र के सेवपुर-हुसैनाबाद मजरे हरदी निवासी रामचरन (35 वर्ष) अपनी पत्नी और भतीजे के साथ सीएचसी की ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे। रामचरन ने बताया कि ओपीडी में मौजूद डॉ. राहुल घोष ने सरकारी पर्चे पर उन्हें खून की कई जांचें कराने के लिए लिख दिया। मरीज के मुताबिक, डॉक्टर ने उनसे कहा कि ये सारी जांचें बाहर से कराकर लाओ।
रामचरन का कहना है कि उन्होंने अस्पताल के अंदर से ही जांच कराने की गुजारिश की, लेकिन डॉक्टर ने कहा कि पर्चे पर लिखी गई सभी जांचें बाहर से ही करानी पड़ेंगी। इसके बाद वह अपने भतीजे के साथ बाहर की एक पैथोलॉजी में जांच कराने पहुंचे तो जांच की कीमत सुनकर उनके होश उड़ गए। खून की जांच के लिए उनसे 900 रुपये मांगे गए। मरीज को मजबूरी में पैथोलॉजी से जांच करानी पड़ी।
रामचरन ने बताया कि वह पिछले लगभग एक सप्ताह से बीमार चल रहे हैं। घर में पैसों का इंतजाम नहीं है। यह सोचकर सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आए थे कि कम खर्च में इलाज हो जाएगा, लेकिन उनके मुताबिक यहां इलाज कराना बहुत महंगा पड़ रहा है।
नियमानुसार हों स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क
स्वास्थ्य मंत्री बार-बार स्वास्थ्य कर्मियों को सच्चा और ईमानदारी का आचरण रखने का पाठ पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद सीएचसी के कई डॉक्टर आम जनता के टैक्स के पैसों से लाखों रुपये वेतन पाने के बाद भी कथित रूप से कमीशन की बाट जोह रहे हैं। सरकारी अस्पताल में आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बाहर से महंगी जांच कराने के लिए भेजे जाने के आरोप गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।
व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद नहीं
क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि सीएचसी आने वाले रोगियों और जरूरतमंद आम जनता को जांच और इलाज के नाम पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस कथित कमाई का हिस्सा कहां तक जा रहा है, इसे लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं हैं। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि सीएचसी को एक रसूखदार का वरदहस्त प्राप्त है, जिसके कारण व्यवस्थाओं में सुधार और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की उम्मीद कमजोर होती जा रही है।













