सूडान के दक्षिण कोर्डोफन प्रांत के कलोगी शहर में गुरुवार को एक किंडरगार्टन पर हुए ड्रोन हमले में कम से कम 50 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 33 बच्चे शामिल हैं। स्थानीय चिकित्सा संगठन सूडान डॉक्टर्स नेटवर्क और सेना ने इस हमले के लिए अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को दोषी ठहराया है, हालांकि आरएसएफ की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
सेना-समर्थित विदेश मंत्रालय के अनुसार, किंडरगार्टन पर दो बार ड्रोन मिसाइलें दागी गईं और बच्चों को बचाने पहुंचे नागरिकों व चिकित्सकों पर भी हमला किया गया। यूनीसेफ ने इसे “बच्चों के अधिकारों का भयानक उल्लंघन” बताते हुए हमलों को तत्काल रोकने और मानवीय सहायता मार्ग खोलने की अपील की। एजेंसी के प्रवक्ता शेल्डन येट ने कहा कि “बच्चों को कभी भी युद्ध की कीमत नहीं चुकानी चाहिए।”
इस हमले के अगले ही दिन आरएसएफ ने प्रतिशोध में आरोप लगाया कि सेना ने दारफुर क्षेत्र में चाड सीमा के पास स्थित एड्रे क्रॉसिंग पर ड्रोन हमला किया, जिसमें ईंधन डिपो और बाजार क्षेत्र को निशाना बनाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
सूडान में अप्रैल 2023 से सेना और आरएसएफ के बीच सत्ता संघर्ष खुली जंग में बदल चुका है। दोनों पहले सत्ता साझेदार थे, लेकिन विवाद ने हजारों लोगों की जान ले ली और लाखों को घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। हाल के महीनों में उत्तर, दक्षिण और पश्चिम कोर्डोफन क्षेत्र युद्ध की नई फ्रंटलाइन बन गया है, जिसकी कुल आबादी लगभग 80 लाख है। सेना की दारफुर दिशा में बढ़त के साथ संघर्ष और भी तेज होने की आशंका जताई जा रही है।


















