रायबरेली। जिलाधिकारी हर्षिता माथुर की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय धरती माता बचाओ समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और उर्वरकों की कालाबाजारी व अवैध तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर समीक्षा की गई।
बैठक में जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय ने जानकारी दी कि भारत सरकार के निर्देशानुसार उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग को नियंत्रित करने, औद्योगिक इकाइयों में उर्वरकों के अवैध डायवर्जन, कालाबाजारी, ओवर रेटिंग और तस्करी को रोकने के उद्देश्य से धरती माता बचाओ अभियान संचालित किया जा रहा है।
इस अभियान के तहत जनपद स्तर पर जिलाधिकारी, तहसील स्तर पर उपजिलाधिकारी और ग्राम स्तर पर ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में निगरानी समितियों का गठन किया गया है।
जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर ही संस्तुत मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के लिए प्रेरित किया जाए।
उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर जैविक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, जिससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार हो सके। इसके साथ ही अधिक मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने वाले किसानों को चिन्हित कर उन्हें संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक किया जाए।
डीएम ने औद्योगिक इकाइयों में अनुदानित उर्वरकों के दुरुपयोग, अवैध तस्करी, कालाबाजारी और ओवर रेटिंग की रोकथाम के लिए कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उर्वरकों से संबंधित किसी भी अनियमितता पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जनपद, तहसील और ग्राम स्तर पर गठित समितियों के माध्यम से उर्वरकों की सतत निगरानी की जा रही है। यदि किसी भी स्तर पर उर्वरकों के औद्योगिक उपयोग में अवैध डायवर्जन, होर्डिंग, तस्करी या अधिक मूल्य वसूली की शिकायत सामने आती है, तो संबंधित के विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत विधिक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अंजू लता, उप कृषि निदेशक विनोद कुमार, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता विवेक कुमार सिंह सहित अन्य जनपदीय अधिकारी और उर्वरक आपूर्तिकर्ता कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


















