रायबरेली। खीरों विकास खंड क्षेत्र के ग्राम हरीपुर मिर्दहा में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बना सामुदायिक शौचालय आज भी ग्रामीणों के लिए बेकार साबित हो रहा है।
सरकार जहां गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने और स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर कई योजनाएं लापरवाही की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही हैं। हरीपुर मिर्दहा का सामुदायिक शौचालय भी ऐसी ही बदहाल व्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व शौचालय का सुंदरीकरण कराया गया था। इसमें नई टाइल्स लगवाई गईं, पत्थर का कार्य कराया गया, नई टोटियां लगाई गईं और छत पर पानी की टंकी भी रखवाई गई।
उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब शौचालय पूरी तरह संचालित होगा और गांव के लोगों को सुविधा मिल सकेगी। लेकिन सुंदरीकरण कार्य के बाद भी शौचालय का संचालन शुरू नहीं हो सका।
ग्रामीणों ने बताया कि छत पर रखी पानी की टंकी में आज तक कनेक्शन ही नहीं किया गया। शौचालय में लगा समरसेबल खराब पड़ा है, जबकि परिसर में लगा हैंडपंप भी लंबे समय से खराब है।
पानी की व्यवस्था न होने के कारण शौचालय उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। हालत यह है कि जब से यह शौचालय बना है, तब से आज तक ग्रामीण इसका उपयोग नहीं कर पाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर केवल दिखावटी कार्य कराया गया, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था नहीं की गई। शौचालय के दरवाजे अधिकतर बंद रहते हैं और परिसर में धीरे-धीरे गंदगी व अव्यवस्था बढ़ती जा रही है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि शौचालय की देखरेख के लिए मानदेय पर कर्मचारी नियुक्त है, लेकिन मौके पर कोई कर्मचारी दिखाई नहीं देता। इसके बावजूद नियमित भुगतान किए जाने की चर्चा ग्रामीणों में बनी हुई है।
इस संबंध में जब खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामले को दिखवाया जाएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शौचालय में पानी की मूलभूत व्यवस्था तक नहीं है, तो लाखों रुपये खर्च कर कराया गया सुंदरीकरण आखिर किस काम का?
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई, तो पूरा शौचालय केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का उदाहरण बनकर रह जाएगा।


















