अधूरे विकास कार्यों का अड्डा बना बेहटा सातनपुर गांव, नाली निर्माण से गरीबों के घरों पर मंडराया खतरा

रायबरेली। खीरों विकास खंड के अंतर्गत आने वाला बेहटा सातनपुर गांव लापरवाही और अधूरे सरकारी कार्यों का प्रतीक बन गया है। यहां विकास कार्यों की ऐसी तस्वीर देखने को मिलती है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों के आवास अधूरे हैं, स्कूल की बाउंड्री वॉल अधूरी पड़ी है, पंचायत भवन की मरम्मत में घपले की चर्चा है और आंगनबाड़ी केंद्र अब तक स्थापित नहीं हुआ। किसानों की खलिहान की जमीन की मिट्टी तक खड़ंजा डालने में प्रयोग कर ली गई, ऐसे कई उदाहरण पिछले चार सालों के कामकाज पर सवाल खड़े करते हैं।

नाली निर्माण बना नई मुसीबत

हाल ही में प्रसाद मार्केट से शिवकुमार के घर तक नाली निर्माण कार्य शुरू हुआ। लेकिन यह नली शिवकुमार पासवान के गेट तक ही बनाई गई, जिससे पानी का बहाव सीधे उनके घर की नींव के पास जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नाली कभी भी शिवकुमार पासवान के घर की नींव गिरा सकती है।

सूत्रों के अनुसार, यह नाली नहर विभाग की पुरानी नाली के ऊपर बनाई गई है, जो पहले खेतों की सिंचाई के लिए प्रयोग होती थी। अब यही नाली ग्रामीणों के लिए खतरा बन रही है।

अधिकारियों ने नहीं दी कोई राहत

गांव के निवासी शुभम शर्मा ने इस मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी, लेकिन ग्राम पंचायत अधिकारी ने फोन नहीं उठाया, जबकि बीडीओ ने केवल फोन पर दिलासा देकर बात खत्म कर दी। ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर नाराज़गी बढ़ती जा रही है।

ग्रामीण बोले- जिम्मेदारों की सूझबूझ गरीबों के लिए आफत

ग्रामीणों का कहना है कि “जेसीबी तो सिर्फ कहने की बात है, असल में अधिकारियों और ठेकेदारों की सूझबूझ से ही गरीबों के आवास खतरे में हैं।” लोगों ने जिला प्रशासन से निर्माण कार्य की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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