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नई दिल्ली। वायु प्रदूषण पर काबू पाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को तत्काल मजबूत करने के निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने खुले में कचरा जलाने की लगातार घटनाओं, पुराने डंपों की सफाई में देरी और प्रवर्तन में खामियों को गंभीर चिंता का विषय बताया है।
ये निर्देश दिल्ली और एनसीआर राज्यों की राज्य सरकारों, नगर निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के साथ कई बैठकों के बाद जारी किए गए हैं। सीएक्यूएम ने स्पष्ट किया कि अपशिष्ट प्रबंधन वायु प्रदूषण से सीधे जुड़ा हुआ है और इस पर निरंतर व प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
दिल्ली पर विशेष निर्देश
दिल्ली में बुनियादी ढांचा उपलब्ध होने के बावजूद नगरपालिका ठोस अपशिष्ट और बायोमास जलाने की घटनाएं जारी पाए जाने पर आयोग ने नाराजगी जताई।
सीएक्यूएम ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को निर्देश दिया कि वह दिसंबर 2027 तक 143.09 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे का निपटान करे, जिसमें लगभग 3.5 लाख मीट्रिक टन प्रति माह की प्रसंस्करण दर सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही मासिक प्रगति रिपोर्ट आयोग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने बिना समयसीमा बढ़ाए अपशिष्ट-प्रसंस्करण सुविधाओं की क्षमता तत्काल बढ़ाने, कचरा-संवेदनशील स्थानों की सख्त निगरानी, कचरे के स्पिल-फ्री परिवहन और डोर-टू-डोर कचरा पृथक्करण अभियान तेज करने को कहा है।
थोक कचरा उत्पादकों को एक महीने के भीतर गीले कचरे का साइट पर ही प्रसंस्करण सुनिश्चित करने तथा शून्य-अपशिष्ट कॉलोनियों के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्रों, फ्लाई ऐश निपटान और मासिक अनुपालन रिपोर्ट की सख्त निगरानी का दायित्व सौंपा गया है।
हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में स्थिति
हरियाणा में विशेष रूप से गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में पुराने कचरे के निपटान और प्रसंस्करण ढांचे में गंभीर देरी पाई गई। गुरुग्राम नगर निगम को 20 जनवरी 2026 तक 14 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी करने और 31 मार्च 2026 तक बायोमाइनिंग शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। फरीदाबाद को दो माह के भीतर विकेंद्रीकृत प्रसंस्करण सुविधाओं के लिए भूमि चिन्हित कर अप्रैल 2026 तक उन्हें चालू करने को कहा गया है।
उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्रों नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी पुराने कचरे के निपटान में देरी और पृथक्करण में असमानता पाई गई। आयोग ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी परियोजना के लिए समयसीमा बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
राजस्थान के एनसीआर जिलों भरतपुर, अलवर और भिवाड़ी में अपशिष्ट उपचार की प्रगति को अपर्याप्त बताते हुए शहरी निकायों को पृथक्करण, निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएक्यूएम ने चेतावनी दी है कि वह अनुपालन की कड़ी निगरानी, अनुवर्ती समीक्षा और आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई करेगा।


















