लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तथा प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में संचालित ‘दिव्यांगजन रोजगार अभियान 2.0’ ने प्रदेश स्तर पर उल्लेखनीय परिणाम दर्ज किए हैं।
6 से 18 फरवरी तक चले इस विशेष अभियान के अंतर्गत 75 जिलों में 1162 दिव्यांगजनों को सवेतन रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा गया। यह पहल उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से संचालित की गई।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से कौशल विकास को सीधे रोजगार से जोड़ने की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल रोजगार उपलब्ध कराने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि दिव्यांग युवाओं को सम्मानजनक जीवन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने बताया कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि समाज का प्रत्येक वर्ग विकास की मुख्यधारा से जुड़ सके। अभियान के दौरान मिशन निदेशक पुलकित खरे के नेतृत्व में सभी जिलों के अधिकारियों के साथ समन्वित रणनीति तैयार की गई।
निर्धारित लक्ष्यों के अतिरिक्त 856 दिव्यांगजन स्वेच्छा से इस अभियान से जुड़े, जिन्हें भी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। अधिकारियों के अनुसार, अभियान की सफलता का प्रमुख कारण जिला स्तर पर सक्रिय समन्वय और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी रही।
इस अभियान में रोजगार मेलों और प्लेसमेंट ड्राइव का विशेष आयोजन किया गया। वित्त, बीमा, टेलीकॉम, रिटेल और सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने भाग लेकर विभिन्न पदों पर नियुक्तियां कीं। टेलीकॉलर, मशीन ऑपरेटर, तकनीकी सहायक, हेल्पर और रिटेल सेल्स एसोसिएट जैसे पदों पर चयनित युवाओं को लगभग 9,000 से 21,000 रुपये तक मासिक वेतन के प्रस्ताव मिले। इसके अतिरिक्त, स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए मोबाइल रिपेयरिंग, सिलाई-कढ़ाई, जन सेवा केंद्र, डेयरी और पशुपालन जैसे उद्यमों से जोड़ने की पहल की गई।
अभियान में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस योजना के तहत कई दिव्यांग युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर स्वरोजगार के अवसर सृजित किए गए। अधिकारियों का कहना है कि वित्तीय सहयोग और प्रशिक्षण के संयोजन से लाभार्थियों को दीर्घकालिक आजीविका सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।
बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों में फतेहपुर, अमरोहा, फर्रुखाबाद, वाराणसी और महाराजगंज शामिल रहे। कई जिलों में मिशन टीम ने घर-घर जाकर संभावित लाभार्थियों से संपर्क किया और व्यक्तिगत काउंसिलिंग के माध्यम से उन्हें योजना की जानकारी दी। इस प्रयास से अधिकाधिक दिव्यांगजन अभियान से जुड़ सके।
पूर्व में संचालित ‘दिव्यांगजन रोजगार अभियान 1.0’ के लाभार्थियों की भी नियमित ट्रैकिंग की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें निरंतर रोजगार से जोड़ा जा सके और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त प्रशिक्षण या मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सके। अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य केवल नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थायी रोजगार सुनिश्चित करना भी है।
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार कौशल विकास के माध्यम से दिव्यांग युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार के विशेष अभियान संचालित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक दिव्यांगजन आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का प्रयास है कि रोजगार के अवसरों के साथ-साथ प्रशिक्षण और परामर्श की व्यवस्था भी सुदृढ़ की जाए।
प्रदेश स्तर पर चलाए गए इस अभियान ने समावेशी विकास की दिशा में एक ठोस कदम प्रस्तुत किया है। 13 दिनों की अवधि में बड़ी संख्या में दिव्यांगजनों को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ना प्रशासनिक समन्वय और योजनाबद्ध कार्यप्रणाली का परिणाम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी इस मॉडल को और सुदृढ़ कर राज्य में दिव्यांगजनों के लिए अवसरों का विस्तार किया जाएगा।


















