रायबरेली में अवैध कटान का खुलासा! ग्राम प्रधान और वन दरोगा पर मिलीभगत से शीशम की लकड़ी बेचने का आरोप

रायबरेली। थाना क्षेत्र के अंतर्गत खजुरिहा बांध से अतरहर रोड पर स्थित डुमटहर मोड़ के पास सड़क किनारे खड़े कीमती शीशम के पेड़ को वन दरोगा मनीष और एक ग्राम प्रधान की मिलीभगत से अवैध रूप से काटे जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने बताया कि यह अवैध कटान का खेल पिछले कई महीनों से जारी है, जिसमें विभागीय मिलीभगत से हरे-भरे पेड़ों को काटकर लकड़ी बेची जा रही है।

स्कूल में खाना बनाने के बहाने काटा गया पेड़

ग्रामीणों के अनुसार, सोमवार को शीशम के विशालकाय पेड़ को काटा जा रहा था। जब ग्रामीणों ने विरोध किया, तो वन दरोगा ने प्रधान से एक लेटरपैड पर यह लिखवा दिया कि लकड़ी स्कूल में खाना बनाने के लिए काटी जा रही है।
हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह केवल अवैध कटान को वैध दिखाने की चाल थी।

गांव में दो दर्जन से अधिक पेड़ों की अवैध कटान

ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान और वन दरोगा की साठगांठ से अब तक दो दर्जन से ज्यादा हरे पेड़ अवैध रूप से काटे जा चुके हैं। लकड़ी ठेकेदारों को ऊंचे दामों में बेची जा रही है। शिकायत के बावजूद विभागीय कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

“रक्षक ही बना हरियाली का भक्षक”

गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि वन विभाग के कुछ अधिकारी खुद अवैध कटान में शामिल हैं। जो विभाग हरियाली की रक्षा के लिए जिम्मेदार है, वही अब उसके विनाश में भागीदार बन गया है। ग्रामीणों ने शीशम के पेड़ की अवैध कटान की शिकायत वन रेंजर नीरज जोशी से की है। रेंजर ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

अवैध कटान से हो रहे मालामाल

लगभग डेढ़ महीने पहले भी प्रधान ने आम के हरे पेड़ की अवैध कटान कराई थी। उस समय भी शिकायत हुई, लेकिन वन विभाग ने मामले को ले-देकर दबा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि कीमती लकड़ियों का यह अवैध कारोबार अब आय का स्थायी स्रोत बन चुका है।

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