शकील अहमद
सरोजनी नगर, लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (उपसिफ्स) में I4C, गृह मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से आयोजित साइबर सिक्योरिटी एवं डिजिटल फॉरेंसिक का साप्ताहिक प्रशिक्षण कोर्स शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह कोर्स संस्थान में आयोजित इस श्रृंखला का तीसरा बैच था।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि राजीव मल्होत्रा, पुलिस महानिरीक्षक, रहे। इस अवसर पर संस्थान के उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
देश के 7 राज्यों से 40 पुलिस अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गोवा और मध्य प्रदेश से आए कुल 40 पुलिस अधिकारियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को
साइबर अपराधों की जांच, डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संग्रहण, मोबाइल, कंप्यूटर व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से डेटा विश्लेषण व साइबर फ्रॉड की तकनीकी पहचान जैसे विषयों पर व्यावहारिक (हैंड्स-ऑन) प्रशिक्षण दिया गया।
साइबर फ्रॉड में पहला घंटा “गोल्डन आवर”–आईजी
समापन सत्र को संबोधित करते हुए आईजी राजीव मल्होत्रा ने कहा कि साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तकनीकी दक्षता और त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज भी जानकारी के अभाव में लोग डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं।
आईजी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि साइबर फ्रॉड के मामलों में पहला घंटा ही गोल्डन आवर होता है। यदि समय रहते सही कदम उठाए जाएं, तो अपराधियों को रोका जा सकता है, अन्यथा देरी का फायदा साइबर ठग उठा लेते हैं। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे पीड़ितों के प्रति संवेदनशील रहें और आमजन को साइबर अपराधों के प्रति लगातार जागरूक करें।
तकनीक से पीछे नहीं रह सकती पुलिस–उप निदेशक
उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में साइबर और फॉरेंसिक ज्ञान अनिवार्य हो चुका है। यदि पुलिस तकनीकी रूप से सक्षम नहीं होगी, तो अपराधी आगे निकल जाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस बल को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हैं।
कार्यक्रम में जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी, प्रतिसार उप निरीक्षक शैलेन्द्र सिंह, फैकल्टी सदस्य डॉ. मनीष राय, गिरिजेश राय, डॉ. पलक, कार्तिकेय सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।


















