रायबरेली में अनियंत्रित स्कूल वैन पलटी, मची चीख-पुकार में आधा दर्जन मासूम घायल
भूसे की तरह से भरे थे 20 मासूम बच्चे, प्रशासन की नाक के नीचे मासूमों की जान से खिलवाड़, विभाग मौन
सह संपादक एसके सोनी निष्पक्ष दर्पण राष्ट्रीय मासिक पत्रिका ND NEWS
रायबरेली। गैर जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से प्रतिदिन स्कूलों की प्राइवेट वैन, बसों से बच्चे स्कूल पढ़ने पहुंचते है, बच्चों को किस तरह स्कूल पहुंचाया जाता है यह शायद रोड पर चल रहे स्कूल वाहनों को देखकर अंदाज लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में जब कोई घटना घटित होती है तो परिजनों से लेकर प्रशासन जाग उठता है, बाद में मामला जस का तस हो जाता है। स्कूलों में बच्चे भेजने पहुंचने में जितना जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन है उनसे कही ज्यादा अभिभावक भी है क्योंकि उनका बच्चा स्कूल कैसे पहुंचता है वह उसे नजरंदाज करते है।
आपको बता दे कि एक ऐसी ही लापरवाही का मामला आज सुबह करीब 9 बजे हरचंदपुर-महाराजगंज मार्ग स्थित सीएचसी (CHC) के पास घटित हुआ जब भूसे की तरह भरी स्कूल वैन के साथ एक बड़ा हादसा हो गया। बताया जाता है कि एक निजी स्कूल की वैन में क्षमता से दोगुना, लगभग 20 बच्चे सवार थे, इसी बीच तेज रफ्तार होने के कारण वैन अनियंत्रित होकर पलट गई। वैन के पलटते ही मौके पर बच्चों की चीख-पुकार मच गई, जिसे सुनकर स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े और घायल बच्चों को नजदीकी सीएचसी पहुंचाया।
हादसे में आधा दर्जन लगभग घायल
इस हादसे की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वैन में करीब 20 बच्चे सवार थे जिसमें लगभग डेढ़ दर्जन बच्चे घायल हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही आनन-फानन में बच्चों को पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) हरचंदपुर ले जाया गया। जहां उनका इलाज किया गया, वही परिजनों को जानकारी मिलते ही चीख पुकार के साथ परिजन अस्पताल पहुंचे। बताया जाता है कि गंभीर घायल बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद दो बच्चों की हालत चिंताजनक देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया गया है।
बताया जाता है कि 5 वर्ष काव्यांश राजपूत पुत्र कमलेश कुमार, निवासी पूरे बैशन के साथ 11 वर्षीय शिवम पुत्र रामकुमार, निवासी नवीगंज सहित अन्य बच्चे शामिल है, शेष बच्चों का इलाज हरचंदपुर सीएचसी में किया गया, जिनमें से अधिकांश सुरक्षित हैं लेकिन गहरे सदमे में हैं।
प्रशासनिक और स्कूल प्रबंधन की लापरवाही उजागर
यह कोई पहली घटना नहीं है इससे पहले भी ऐसी घटनाओं को अपने पढ़ा या सुना होगा, यह हादसा सड़क हादसा की घटना निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करती है। जो पैसा कमाने वो बचाने के लिए एक दो चक्कर में ही बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रख वाहनों को दौड़ाया जाता है।
लापरवाह आरटीओ विभाग, सिर्फ खानापूर्ति
जनपद भर में चल रही स्कूल वैन की बात करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में चार वाहनों में दो फिट दो अनफिट मिलेंगे, वहीं ज्यादातर स्कूलों में आज भी खटारा निजी वैन का प्रयोग देखा जा सकता है। जबकि एक छोटी वैन में 20 बच्चों को बैठाना नियमों का उल्लंघन है।फिरहाल घटना के बाद अभिभावकों में इस घटना को लेकर काफी रोष व्याप्त है और उन्होंने दोषी स्कूल प्रबंधन व चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि इसे डग्गामार और ओवरलोडेड स्कूली वाहनों पर प्रशासन कब नकेल कसेगा, या फिर मासूमों की जिंदगी इसी तरह दांव पर लगी रहेगी।
स्थानीय पुलिस बनी रहती मूक दर्शक
जनपद रायबरेली की हर तहसील क्षेत्र में स्कूल में बच्चे लाने ले जाने के लिए बैटरी रिक्शा, ऑटो सहित निजी प्राइवेट वैन को लगाकर बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जाता है। ऐसे वाहन प्रशासन की निगरानी में नहीं पहुंचते लेकिन लोकल पुलिस इन्हें देखकर नजरंदाज कर देती है। रोड पर चल रहा पुलिस का चेकिंग अभियान भी भूसे कि तरह जा रही स्कूल वैन को चेक नहीं करता है, जबकि स्थानीय पुलिस को ऐसे वाहनों पर शिकंजा कसना चाहिए।
जिम्मेदार अभिभावक लापरवाह क्यों?
स्कूल में पढ़ने वाला हर बच्चा घर से बाहर अभिभावक की निगरानी में निकलता है, परिजनों द्वारा उसे बस, कार वैन में स्कूल जाने के लिए बैठाया जाता है, बावजूद अभिभावक अपने बच्चे को उसे भूसे की तरह भरी गाड़ी में भेज देता है, जबकि अभिभावकों को स्कूल प्रबंधन से ऐसे मुद्दों पर बात करनी चाहिए। लेकिन लापरवाह अभिभावक ही अपने बच्चों को ऐसे वाहनों में बैठ कर भेजते हैं जो जोखिम भरे होते हैं, फिर दुर्घटना घटने पर स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते है। ऐसे में जिम्मेदार स्कूल प्रबंधन सहित अभिभावक भी सवालो के घेरे में आते है। अपने बच्चों की जान को जोखिम से बचाने के लिए ऐसे वाहनों के लिए स्कूल प्रबंधन से शिकायत जरूर करें। न माने तो उच्च अधिकारियों से शिकायत भी कर सकते हैं।



















