सोनौली। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी (नेपाल) में ‘विश्व शांति धाम’ का निर्माण किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पूरे विश्व में शांति, अहिंसा और करुणा का संदेश फैलाना है। यह परियोजना वैश्विक स्तर पर मानवता को जोड़ने और संवाद के माध्यम से शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

इस धाम में म्यूजियम, लाइब्रेरी, ध्यान केंद्र और कॉन्फ्रेंस हॉल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। साथ ही, इसकी सबसे ऊपरी मंजिल पर भगवान बुद्ध की माता माया देवी की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
वैश्विक अध्ययन और शोध का केंद्र बनेगा धाम

निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह स्थान विश्वभर के विद्यार्थियों और विद्वानों के लिए शांति, अध्यात्म और दर्शन पर शोध व संवाद का प्रमुख केंद्र बनेगा। यहां आने वाले लोग न केवल ध्यान और आत्मचिंतन कर सकेंगे, बल्कि वैश्विक शांति के संदेश को भी आगे बढ़ा सकेंगे।
विशेष डिजाइन और सुविधाएं

विश्व शांति धाम की संरचना कमल के फूल, मक्खन के दीपक और स्तूप की प्रेरणा से तैयार की जा रही है। यहां 1000 से अधिक लोगों की क्षमता वाला भव्य सभागार, संग्रहालय, पुस्तकालय, शाकाहारी भोजनालय और भिक्षुओं के लिए आवासीय व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
यह केंद्र बिना किसी भेदभाव के मानवता को एक मंच पर लाने और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
धर्मगुरु का दृष्टिकोण
इस परियोजना से जुड़े धर्मगुरु और लेखक श्यालपा तेनजिन रिनपोचे ने बताया कि भगवान बुद्ध का जन्म लुंबिनी में हुआ और यह स्थल विश्व शांति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह धाम वैश्विक एकता और करुणा के संदेश को सुदृढ़ करेगा।
इस अवसर पर उन्होंने अपनी पुस्तक “मुक्ति का मार्ग” का विमोचन भी किया। इससे पहले इस पुस्तक का विमोचन बोधगया में किया जा चुका है।
उन्होंने भारत और नेपाल के बीच बुद्ध सर्किट को विकसित करने और सांस्कृतिक-आध्यात्मिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।


















