रायबरेली। विकासखंड सरेनी में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना – वाटरशेड 2.0 के अंतर्गत वाटरशेड महोत्सव का आयोजन ग्राम पंचायत रसूलपुर (माइक्रो वाटरशेड कोड: मुरारमऊ) में किया गया। भूमि संरक्षण विभाग रायबरेली द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों में जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और परियोजना के परिणामों के प्रति जागरूकता एवं सहभागिता बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में विकासखंड सरेनी के ब्लॉक प्रमुख की प्रतिनिधि डॉ. अनिल सिंह ने किया। महोत्सव के दौरान श्रमदान, वृक्षारोपण और स्कूली बच्चों के साथ प्रभात फेरी निकालकर “जल, जंगल, जमीन बचाओ” का संदेश घर-घर पहुंचाया गया।
इसके अतिरिक्त मोटरसाइकिल रैली और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकालकर जन-जागरूकता अभियान को व्यापक स्वरूप दिया गया।

रसूलपुर बाजार में आयोजित गोष्ठी में भूमि संरक्षण अधिकारी जगदीश प्रसाद ने वाटरशेड 2.0 परियोजना के उद्देश्यों और लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि जल की एक-एक बूंद का संरक्षण आवश्यक है। उन्होंने किसानों को बताया कि किस प्रकार परियोजना के माध्यम से जल संरक्षण कर फसल उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है।
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पाण्डेय ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के उपाय बताए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और वैज्ञानिक खेती एक-दूसरे के पूरक हैं।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अनिल सिंह ने उपस्थित ग्रामीणों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि धरती माता की रक्षा कर ही शुद्ध जल, शुद्ध वायु और सुरक्षित भोजन सुनिश्चित किया जा सकता है। सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाया जा सकता है।
महोत्सव में ग्राम प्रधान देवपुर विष्णु प्रताप सिंह, प्रधान समोदा राजीव त्रिवेदी, ग्राम प्रधान रसूलपुर सुरेश सिंह, ग्राम प्रधान काजी खेड़ा रामबरन सिंह, ग्राम प्रधान रामखेड़ा शिवमोहन, ग्राम प्रधान सातवा खेड़ा कृष्ण कुमार साहू, बीडीसी रसूलपुर शुभम शर्मा, बीडीसी गोविंदपुर संतोष कुमार सहित भूमि संरक्षण विभाग के वरिष्ठ तकनीकी सहायक प्रशांत कुमार उपाध्याय, जेई विनोद कुमार, शिवम सोनी, ड्राफ्टमैन घनश्याम, इंस्पेक्टर वीरेंद्र प्रताप सिंह, भूपेंद्र सिंह, संजय कुमार, आशीष यादव, शिवेंद्र पटेल और शिवकुमार समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
यह आयोजन जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामुदायिक भागीदारी को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


















