शकील अहमद
लखनऊ। हनुमान जयंती, जिसे हनुमान जन्मोत्सव के रूप में भी जाना जाता है, पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान हनुमान के जन्म दिवस के रूप में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि चैत्र पूर्णिमा के दिन बजरंगबली का जन्म हुआ था, जो बल, बुद्धि, साहस और अटूट भक्ति के प्रतीक हैं।
श्री धाम टीकर माफी के आचार्य करुणाकांत शास्त्री ने बताया कि धार्मिक दृष्टि से हनुमान जी को कलयुग का सबसे जागृत देवता माना जाता है, जो अपने भक्तों के सभी संकट हरते हैं और उन्हें नकारात्मक शक्तियों से बचाते हैं।
इस दिन भक्त मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। कई स्थानों पर भंडारे और शोभायात्राओं का भी आयोजन होता है।
उन्होंने बताया कि हनुमान जयंती का मुख्य संदेश निस्वार्थ सेवा, समर्पण और साहस है। भगवान हनुमान ने भगवान श्रीराम के प्रति अपनी अटूट भक्ति से यह सिद्ध किया कि सच्चे मन और विनम्रता से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।
इस दिन सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और भक्तों को शक्ति, बुद्धि एवं ज्ञान का आशीर्वाद देते हैं। साथ ही रामायण और सुंदरकांड का पाठ भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, हनुमान जी की पूजा से शनि और मंगल ग्रह से जुड़े दोषों से भी मुक्ति मिलती है, इसलिए यह दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
आचार्य करुणाकांत शास्त्री एवं पंडित हर्ष देवाचार्य ने बताया कि यह पर्व समाज को सकारात्मक संदेश देता है। यह दिन हमें सिखाता है कि बुराई पर अच्छाई की जीत होती है और सच्ची भक्ति से हर संकट का समाधान संभव है।
उन्होंने कहा कि हनुमान जयंती केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि समाज में एकता, सेवा और सद्भाव को बढ़ावा देने का अवसर भी है। यह पर्व लोगों के जीवन में नई ऊर्जा, विश्वास और उत्साह का संचार करता है।


















