ग्रीन बिल्डिंग्स से 30–40% ऊर्जा बचत संभव, यह जन-आंदोलन बने: डॉ. राजेश्वर सिंह

शकील अहमद

लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शनिवार को गोमती नगर स्थित होटल ग्रैंड जेबीआर में लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन द्वारा आयोजित “ट्रांसफॉर्मिंग रियल एस्टेट इन उत्तर प्रदेश थ्रू ग्रीन बिल्डिंग्स” विषयक सम्मेलन में सहभागिता की।

उन्होंने कहा कि ग्रीन एनर्जी अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। अपने संबोधन में डॉ. सिंह ने वायु प्रदूषण, गिरते भूजल स्तर और बढ़ते AQI को भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष 70 लाख से अधिक लोगों की असमय मृत्यु वायु प्रदूषण के कारण होती है, जिनमें लगभग 24 लाख मौतें भारत में होती हैं।

उन्होंने अर्थ ओवरशूट डे का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 1972 में यह 26 दिसंबर को आता था, जबकि अब यह अगस्त के पहले सप्ताह में आ चुका है, जो प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को दर्शाता है।
ग्रीन बिल्डिंग्स के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विधायक ने कहा कि यह केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि ग्रीन बिल्डिंग्स से 30–40 प्रतिशत ऊर्जा और 20–30 प्रतिशत जल की बचत संभव है। देश में लगभग 70 प्रतिशत इमारतें अभी बननी शेष हैं, ऐसे में ग्रीन कंस्ट्रक्शन को मुख्यधारा में लाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से कर छूट, कम ब्याज दर पर ऋण, FAR में बढ़ोतरी और संपत्ति कर में रियायत जैसे प्रोत्साहनों को और सशक्त बनाने का आग्रह किया।

डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश द्वारा ग्रीन बिल्डिंग कोड अपनाने की सराहना की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 1 गीगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है और 22,000 मेगावाट का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जो भारत के नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य के अनुरूप है।

सरोजनीनगर क्षेत्र के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वहां 160 से अधिक तारा शक्ति केंद्रों के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को सशक्त किया गया है। इन केंद्रों में 2000 से अधिक सिलाई मशीनों की व्यवस्था की गई है और अब तक 30,000 से अधिक इको-फ्रेंडली स्कूल बैग तैयार कर प्राथमिक विद्यालयों में वितरित किए गए हैं, जिससे प्लास्टिक उपयोग में कमी आई है।

उन्होंने बताया कि उनके कार्यालय में सोलर हेल्प डेस्क संचालित है और लखनऊ की कुल 120 मेगावाट सौर क्षमता में से 60 मेगावाट से अधिक अकेले सरोजनीनगर में स्थापित की जा चुकी है। डॉ. सिंह ने शिविरी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का भी उल्लेख किया, जो प्रतिदिन लगभग 2100 मीट्रिक टन कचरे को ऊर्जा में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है।

इसके माध्यम से लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बनने की दिशा में अग्रसर है, जहां संपूर्ण कचरे को ऊर्जा में बदला जा सकेगा। सम्मेलन को उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में लखनऊ मैनेजमेंट एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी, इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल, SIDBI सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि, आर्किटेक्ट, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सम्मेलन से प्राप्त सुझावों को नीति स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश को हरित, स्वच्छ और सतत विकास का मॉडल राज्य बनाया जा सके।

Share this article

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts