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लखनऊ

क्राइम सीन मैनेजमेंट प्रशिक्षण का समापन, डॉ. राजेश्वर सिंह बोले- अपराधी साक्ष्य छोड़ता ही छोड़ता है

दिनांक: Saturday, 06 June 2026 | समय: 02:58 AM | लेखक: | श्रेणी: लखनऊ
  • फॉरेंसिक जांच को बताया न्याय की कुंजी, विधायक निधि से 25 लाख रुपये देने की घोषणा, 98 पुलिसकर्मियों ने पूरा किया प्रशिक्षण

शकील अहमद

लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस, लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस तकनीकी सेवाओं के सौजन्य से आयोजित “क्राइम सीन मैनेजमेंट” के चौथे बैच का 45 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। समापन समारोह में सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी, आईजी राजीव मल्होत्रा तथा डीआईजी हेमराज मीना ने उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने संस्थान परिसर में अधिकारियों के साथ पौधारोपण भी किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न कमिश्नरेट और जनपदों से आरक्षी से लेकर उपनिरीक्षक स्तर तक के कुल 98 पुलिसकर्मियों ने भाग लिया।

फॉरेंसिक जांच न्याय दिलाने का सबसे प्रभावी माध्यम

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि न्याय दिलाना, निर्दोष को बचाना और दोषियों को सजा दिलाना तीनों ही समान रूप से आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा कि “चाहे डिजिटल अपराध हो या फिजिकल अपराध, अपराधी कहीं न कहीं साक्ष्य जरूर छोड़ता है। उन साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से संकलित और विश्लेषित करना जांच एजेंसियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।”

डॉ. सिंह ने आर्थिक अपराधों और साइबर ठगी के बढ़ते मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन फ्रॉड और वित्तीय अपराधों के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है। ऐसे मामलों में समय रहते तकनीकी जांच और फॉरेंसिक विश्लेषण बेहद जरूरी हो जाता है।

भविष्य फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन और तकनीकी जांच का

अपने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाला समय फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन और तकनीकी साक्ष्यों पर आधारित जांच का है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान को जमीनी स्तर पर लागू कर आमजन को त्वरित और निष्पक्ष न्याय दिलाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक के इस दौर में अपराध और अपराधियों के तौर-तरीके बदल रहे हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारियों को भी तकनीकी रूप से दक्ष होना होगा।

विधायक निधि से 25 लाख रुपये देने की घोषणा

समारोह के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने संस्थान में शैक्षणिक और प्रशिक्षण गतिविधियों के विकास के लिए अपनी विधायक निधि से 25 लाख रुपये देने की घोषणा की। उनकी इस घोषणा पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

न्याय केवल होना ही नहीं, दिखना भी चाहिए: डॉ. जी.के. गोस्वामी

संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान केवल अपराधियों को सजा दिलाने का माध्यम नहीं है, बल्कि निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने में भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि “गवाह बदल सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं बदलते। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए और इसमें फॉरेंसिक जांच की भूमिका बेहद अहम है।”

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मी हुए सम्मानित

प्रशिक्षण के दौरान आयोजित संयुक्त परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया। राकेश प्रसाद ने प्रथम, राहुल सिंह ने द्वितीय और सचिन कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

कार्यक्रम में आईजी राजीव मल्होत्रा, उप निदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव, चिरंजीव मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. सपना शर्मा, डॉ. प्रीति, डॉ. श्रुतिदास गुप्ता, डॉ. मनीष राय, डॉ. स्नेहा, डॉ. नेहा, डॉ. पलक अनेजा सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और प्रशिक्षु पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।

फॉरेंसिक आधारित जांच से बढ़ेगा जनता का विश्वास

समापन सत्र में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक अपराधों की जांच में फॉरेंसिक विज्ञान की भूमिका लगातार बढ़ रही है। वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच न केवल अपराधियों को कानून के शिकंजे तक पहुंचाने में मदद करती है, बल्कि न्याय व्यवस्था में आमजन के विश्वास को भी मजबूत करती है।

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