रायबरेली में किसानों के लिए सुनहरा मौका, निःशुल्क बीज मिनीकिट वितरण योजना शुरू

  • उरद, मूंग, अरहर, तिल, बाजरा, रागी और कोदो के बीज होंगे मुफ्त उपलब्ध, पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा लाभ

रायबरेली। रायबरेली जनपद के किसानों के लिए कृषि विभाग ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहन देने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा श्री अन्न (मोटे अनाज) के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न फसलों के निःशुल्क बीज मिनीकिट उपलब्ध कराए गए हैं। इन मिनीकिटों के वितरण के लिए किसानों की बुकिंग प्रक्रिया संचालित की जा रही है।

कृषि विभाग के अनुसार इच्छुक किसान अपने निकटतम राजकीय कृषि बीज भण्डार, विकास खण्ड स्तर पर तैनात कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त जनसुविधा केंद्रों के माध्यम से भी बुकिंग कराई जा सकती है। निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद किसानों को निःशुल्क बीज मिनीकिट उपलब्ध कराए जाएंगे।

जनपद में वर्तमान समय में उरद के 1,958 पैकेट, मूंग के 300 पैकेट, अरहर के 1,600 पैकेट (प्रति पैकेट 04 कि0ग्रा0) इसी तहर कोदो के 233 पैकेट, रागी (मंडुआ) के 990 पैकेट (प्रति पैकेट 03 कि0ग्रा0) तथा तिल के 1,400 पैकेट (प्रति पैकेट 02 कि0ग्रा0) एवं बाजरा के 3,554 पैकेट (प्रति पैकेट 01 कि0ग्रा0) उपलब्ध हैं। प्रत्येक फसल के लिए निर्धारित मात्रा में बीज पैकेट किसानों को निःशुल्क प्रदान किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि दलहनी फसलें जैसे मूंग, उरद और अरहर न केवल किसानों को बेहतर आय देती हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ाती हैं। वहीं तिल जैसी तिलहनी फसलें कम लागत में अच्छी आमदनी का स्रोत बन सकती हैं क्योंकि बाजार में इनकी मांग लगातार बनी रहती है।

श्री अन्न की श्रेणी में आने वाले बाजरा, रागी (मंडुआ) और कोदो आज स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच भी चर्चा का विषय हैं। ये फसलें पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं और कम पानी तथा प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में भी अच्छी पैदावार देती हैं। जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी फसलें किसानों के लिए अधिक लाभकारी और सुरक्षित विकल्प साबित हो रही हैं।

कृषि विभाग किसानों को इन फसलों की खेती अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रहा है। विभाग का मानना है कि श्री अन्न, दलहनी एवं तिलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूत किया जा सकता है।

जिला कृषि अधिकारी अखिलेष पाण्डेय ने किसानों से अपील की है कि वे https://agriculture.up.gov.in पोर्टल पर अथवा अन्य उपलब्ध माध्यमों से शीघ्र बुकिंग कराकर निःशुल्क बीज मिनीकिट का लाभ उठाएं। चूंकि मिनीकिटों की संख्या सीमित है, इसलिए पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर वितरण किया जाएगा।

आज आवश्यकता इस बात की है कि किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ ऐसी फसलों को भी अपनाएं जो कम लागत में अधिक लाभ देने वाली हों। श्री अन्न, दलहनी और तिलहनी फसलें न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करेंगी बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

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