- उन्नाव जिले से संपत्ति बेचकर खीरों के फिरोजाबाद में आई थी रहने
रायबरेली। खीरों थाना क्षेत्र के अंतर्गत फिरोजाबाद मजरे खीरों में बुधवार की भोर में लगभग चार बजे चारपाई पर सो रही एक वृद्धा बिस्तर सहित आग की लपटों में जिंदा जल कर राख हो गई। संदिग्ध परिस्थितियों में हुई वृद्ध की दर्दनाक मौत कई सवाल खड़े कर रही है। वृद्धा मूल रूप से उन्नाव जिले के मौरावां थाना क्षेत्र के पठई गांव की रहने वाली थी।
लगभग चार वर्ष पहले वह अपनी सारी अचल संपत्ति बेचकर थाना क्षेत्र के फिरोजाबाद मजरे खीरों में रामनरेश पासी के घर पर रहने लगी थी। रामनरेश ने पुलिस को दी गई तहरीर में वृद्धा की मौत के मामले को आत्महत्या बताया है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस घटना की जांच कर रही है।
रामावती पत्नी रामकुमार साहू उर्फ महाजन (70 वर्ष) मूल रूप से उन्नाव जिले के मौरावां थाना क्षेत्र के अंतर्गत पठई गांव की रहने वाली थी। लगभग चार वर्ष पहले खीरों कस्बे में आयोजित हुए एक सत्संग के कार्यक्रम में उसकी मुलाकात फिरोजाबाद निवासी रामनरेश पासी से हुई। इसके बाद वृद्धा ने अपने मूल निवास पठई में स्थित खेती- बाड़ी की जमीन, घर और अन्य संपत्ति को बेच दिया और फिरोजाबाद मजरे खीरों में आकर रामनरेश पासी के घर पर रहने लगी।
बुधवार की भोर में लगभग चार बजे कमरे के बाहर बरामदे में बिस्तर पर सोते हुए अचानक चारपाई में आग की उठती लपटों के बीच वृद्धा जलकर राख हो गई। सुबह घटना की सूचना रामनरेश पासी ने पुलिस को दिया। उसकी ओर से दी गई तहरीर में बताया गया कि वृद्धा ने आत्महत्या कर लिया है।
संदिग्ध परिस्थितियों में हुई वृद्ध की मौत के मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दिया है। ग्रामीणों से की गई पूछताछ में पुलिस को मामले के संबंध में कई अहम जानकारियां मिली हैं। प्रभारी निरीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना की जांच की जा रही है।
संदिग्ध मौत की तह तक जा रही पुलिस
ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि वृद्धा जिस घर में रहती थी, उसका निर्माण उसने स्वयं ही करवाया था। रामनरेश से कहती थी कि मेरे न रहने के बाद यह घर तुम्हारा होगा।
घंटों बाद दी गई पुलिस को सूचना
रामनरेश ने बताया कि घटना के वक्त वह घर पर नहीं था। वृद्धा चार साल से जिस घर में रहती थी, वह उसका निजी घर है। वृद्धा उसे पांच सौ रूपये हर महीने किराया देती थी।













