रायबरेली। जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ऊंचाहार और बछरावां एफआरयू में ब्लड स्टोरेज यूनिट की शुरुआत कर दी गई है। इससे प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली आपात स्थितियों में रक्त उपलब्ध कराने के लिए अब जिला अस्पताल पर निर्भरता नहीं रह गई है। ऊंचाहार एफआरयू की यूनिट मार्च से कार्यरत है और अब तक छह प्रसूताओं को जीवनरक्षक रक्त प्रदान किया जा चुका है, जबकि बछरावां में यह सुविधा मंगलवार से शुरू हुई।
खैरहरी गांव की 24 वर्षीय रानी के परिजनों ने बताया कि प्रसव के बाद रक्त की आवश्यकता पड़ने पर उन्हें किसी तरह की भागदौड़ नहीं करनी पड़ी क्योंकि रक्त उसी अस्पताल में उपलब्ध था। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुविधा महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने कहा, “मातृ मृत्यु दर कम करने और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। एफआरयू स्तर पर ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू होना इस दिशा में बड़ी उपलब्धि है क्योंकि पहले रेफरल में समय और जोखिम दोनों बढ़ जाते थे।”
जिले में कुल पांच एफआरयू—ऊंचाहार, बछरावां, लालगंज, डलमऊ और सलोन स्थित हैं, जिनमें से दो में यूनिट शुरू हो चुकी है जबकि शेष तीन में स्थापना की प्रक्रिया जारी है।
ऊंचाहार एफआरयू: हर माह 194 प्रसव, अब जोखिम हुआ कम
एफआरयू ऊंचाहार के अधीक्षक डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि यहां हर माह करीब 194 प्रसव और लगभग 13 सिजेरियन किए जाते हैं। सभी मामलों में रक्त की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन जब जरूरत पड़ती है, तब यह यूनिट जीवनरक्षक साबित होती है। यह सुविधा जननी-शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध है।
महिला चिकित्सक डॉ. वान्या मिश्रा ने बताया कि जिन छह प्रसूताओं को रक्त चढ़ाया गया, उनमें सामान्य प्रसव के बाद कमजोरी, चक्कर, या हीमोग्लोबिन में गिरावट जैसी स्थितियां पाई गई थीं। पहले ऐसे मामलों को रेफर करना पड़ता था, लेकिन अब उपचार वहीं पूरा हो रहा है।
बछरावां एफआरयू: पहले दिन ही गर्भवती गुड़िया को मिला रक्त
मंगलवार को शुरू हुई बछरावां एफआरयू की यूनिट से पहले ही दिन 22 वर्षीय गर्भवती गुड़िया को हीमोग्लोबिन 7.8 होने पर रक्त चढ़ाया गया। अधीक्षक डॉ. अर्पिता श्रीवास्तव ने बताया कि हीमोग्लोबिन की कमी प्रसव के समय गंभीर जोखिम बनाती है। रक्त मिलने से उनकी स्थिति में तेजी से सुधार होगा।
कैसे काम करती है ब्लड स्टोरेज यूनिट?
ऊंचाहार यूनिट के नोडल प्रभारी डॉ. सुदेश ने बताया कि जिला अस्पताल से रक्त क्रॉस–मैच कराकर एफआरयू में सुरक्षित रखा जाता है। मरीज को रक्त देने से पहले पुनः क्रॉस–मैच और संक्रमण जांच अनिवार्य रूप से की जाती है। यूनिट में पांच सदस्यीय प्रशिक्षित टीम तैनात है।
“हर गांव के करीब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा”-डीएस अस्थाना
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस. अस्थाना ने कहा, “सरकार का लक्ष्य है कि हर जरूरतमंद व्यक्ति को घर के पास ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा मिले। एफआरयू में ब्लड स्टोरेज यूनिट की स्थापना इसी दिशा में बड़ा कदम है।”


















