रायबरेली। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। सलोन ब्लॉक में मध्यम और गंभीर एनीमिया वाली महिलाओं को पहले समुचित उपचार उपलब्ध नहीं हो पाता था। सितंबर 2024 से मार्च 2025 तक पूरे ब्लॉक में केवल 70 Iron Sucrose डोज ही चढ़ाई जा सकीं।
क्या बदल गया?
अप्रैल 2025 में UPTSU के सहयोग से एफआरयू सलोन में मैटरनल एनीमिया मैनेजमेंट कार्नर (MAMC) स्थापित किया गया।
यहाँ:
• गर्भवती महिलाओं की सही स्क्रीनिंग
• लाइन-लिस्टिंग
• विस्तार से काउंसलिंग
• समय पर Iron Sucrose की डोज
• फॉलोअप
• स्टाफ को प्रोटोकॉल आधारित प्रशिक्षण
• Iron Sucrose Register के माध्यम से मॉनिटरिंग नियमित रूप से की जा रही है।
आठ महीनों में मिला बड़ा परिणाम
MAMC शुरू होने के बाद 263 Iron Sucrose डोज दी गईं, यानी पहले की तुलना में 3.7 गुना वृद्धि।यह दर्शाता है कि सही व्यवस्था, जागरूकता और निरंतर उपचार से मातृ एनीमिया में तेज और ठोस सुधार संभव है।
मुख्य प्रभाव
• रेफरल मामले कम हुए
• ब्लॉक स्तर पर ही प्रभावी उपचार
• काउंसलिंग और फॉलोअप में सुधार
• गर्भवती महिलाएँ स्वस्थ महसूस करने लगीं
डॉक्टरों की विशेषज्ञ राय
सीएमओ ने कहा कि “सलोन में मिली यह सफलता बाकी एफआरयू में भी लागू की जा रही है। ऊंचाहार, लालगंज और बछरावां में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुआ है।”
सीएचसी सलोन अधीक्षक डॉ. अमित सिंह ने बताया
“अब मातृ एनीमिया प्रबंधन मजबूत हुआ है और गर्भवती माताओं का हीमोग्लोबिन स्तर तेजी से सुधर रहा है।”
लाभान्वित गर्भवती का अनुभव
करहिया बाजार निवासी सरिता बोलीं कि “पहले बहुत कमजोरी रहती थी, लेकिन आयरन चढ़ने के बाद अब खुद को बेहतर और मजबूत महसूस करती हूँ।”


















