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कार्थी अभिनीत फिल्म ‘वा वाथियार’ की रिलीज को लेकर अनिश्चितता और गहराती नजर आई। फिल्म पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर प्रोडक्शन कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज कर दी। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट में भी फिल्म को राहत नहीं मिल सकी थी। नतीजतन 24 दिसंबर को प्रस्तावित रिलीज पर अब भी संशय बना हुआ है और कानूनी अड़चनें समाप्त होती नहीं दिख रहीं।
इधर, अभिनेत्री निधि अग्रवाल अभिनीत फिल्म ‘द राजा साब’ के गाने के अनधिकृत लॉन्च को लेकर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। हैदराबाद के लुलु मॉल में हुए इस कार्यक्रम को लेकर केपीएचबी पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए आयोजकों और मॉल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि बिना पूर्व अनुमति के सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करना कानूनन अपराध है। गाने के लॉन्च के दौरान हुई अव्यवस्था और उससे जुड़े वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह कार्रवाई की गई।
मलयालम अभिनेता दिलीप को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनका पासपोर्ट वापस कर दिया है, जिसे जांच के दौरान जब्त किया गया था। अभिनेता ने फिल्म प्रमोशन के सिलसिले में विदेश यात्रा की अनुमति के लिए याचिका दाखिल की थी। अदालत ने जांच पूरी होने और दोष सिद्ध न होने के आधार पर पासपोर्ट लौटाने का आदेश दिया, जिससे दिलीप के विदेश जाने का रास्ता साफ हो गया।
संगीत प्रेमियों के लिए भी दिन खास रहा। थलापति विजय की आगामी फिल्म ‘जन नायकन’ का दूसरा गीत ‘ओरु पेरे वरलारु’ रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गया। अनिरुद्ध रविचंदर के संगीत और विशाल मिश्रा व अनिरुद्ध की आवाज में गाए गए इस गीत ने फिल्म के प्रचार को नई गति दी है। राजनीतिक संदेश और व्यापक अपील के साथ यह गाना दर्शकों में खासा उत्साह जगा रहा है। फिल्म 9 जनवरी को दुनिया भर में रिलीज होने वाली है।
वहीं, मोहनलाल अभिनीत फिल्म ‘कर्मयोद्धा’ से जुड़े 13 साल पुराने स्क्रिप्ट विवाद में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया। कोट्टायम वाणिज्यिक न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फिल्म की कहानी, पटकथा और संवाद लेखक रेजी मैथ्यू के हैं। अदालत ने माना कि उनकी अनुमति के बिना स्क्रिप्ट का उपयोग किया गया और इसके लिए 30 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही फिल्म का कॉपीराइट भी रेजी मैथ्यू को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
इन तमाम घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में रचनात्मकता के साथ-साथ कानूनी और प्रशासनिक मुद्दे भी बराबर अहम भूमिका निभा रहे हैं।


















