दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका के बीच राजनयिक तनाव और गहरा हो गया है। दक्षिण अफ्रीका ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि उसने केन्याई नागरिकों को बिना वैध कार्य परमिट के शरणार्थी आवेदन प्रसंस्करण केंद्रों में काम पर लगाया। इस मामले में दक्षिण अफ्रीका की गृह मामलों से जुड़ी एजेंसियों ने सात केन्याई नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तल्खी और बढ़ गई है।
दक्षिण अफ्रीका के गृह मामलों विभाग ने बताया कि खुफिया रिपोर्टों के आधार पर यह कार्रवाई की गई। जांच में सामने आया कि ये केन्याई नागरिक पर्यटक वीजा पर देश में दाखिल हुए थे, लेकिन बाद में एक शरणार्थी प्रसंस्करण सुविधा में अवैध रूप से काम करते पाए गए। विभाग के अनुसार, इन लोगों को पहले कार्य वीजा देने से इनकार किया जा चुका था, इसके बावजूद वे काम कर रहे थे, जो आव्रजन और वीजा कानूनों का सीधा उल्लंघन है।
दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार सभी केन्याई नागरिकों को निर्वासित किया जाएगा और उन पर पांच वर्षों के लिए देश में प्रवेश प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि कानून के तहत यह कार्रवाई अनिवार्य थी और इसमें किसी तरह का राजनीतिक उद्देश्य नहीं है।
इस बीच अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उसने मानवीय सहायता से जुड़े अमेरिकी अधिकारियों को परेशान किया और उनके पासपोर्ट से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक कीं। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे डराने और उत्पीड़न की कार्रवाई करार दिया। अमेरिका का यह भी कहना है कि दक्षिण अफ्रीका ने श्वेत दक्षिण अफ्रीकियों को शरणार्थी के रूप में स्वीकार करने की प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया है।
दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी अमेरिकी अधिकारी को गिरफ्तार नहीं किया गया और न ही किसी राजनयिक परिसर में छापेमारी हुई। उनका कहना है कि कार्रवाई केवल अवैध आव्रजन और वीजा के दुरुपयोग के खिलाफ थी। सरकार ने यह भी चिंता जताई कि कुछ विदेशी अधिकारी बिना दस्तावेज वाले श्रमिकों के साथ समन्वय कर रहे थे, जिस पर अमेरिका और केन्या दोनों से औपचारिक संपर्क किया गया है।
यह विवाद उस पृष्ठभूमि में और संवेदनशील हो गया है, जब अमेरिका ने हाल के वर्षों में अपनी वार्षिक शरणार्थी सीमा को काफी घटा दिया है, लेकिन श्वेत दक्षिण अफ्रीकियों, जिन्हें अफ्रीकानेर समुदाय कहा जाता है, को प्राथमिकता देने की बात कही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार दावा कर चुके हैं कि दक्षिण अफ्रीका में अफ्रीकानेर समुदाय उत्पीड़न और ‘नरसंहार’ का सामना कर रहा है, हालांकि इन दावों के समर्थन में अब तक कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है।
तनाव की एक और वजह दक्षिण अफ्रीका का नया भूमि कानून भी माना जा रहा है, जिस पर राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने हाल ही में हस्ताक्षर किए हैं। यह कानून दुर्लभ परिस्थितियों में मुआवजे के बिना भूमि अधिग्रहण की अनुमति देता है। सरकार का कहना है कि अब तक इस कानून के तहत किसी भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया है और इसका उद्देश्य रंगभेद काल की ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करना है। वर्तमान में दक्षिण अफ्रीका की अधिकांश कृषि भूमि श्वेत समुदाय के पास है।
हाल के महीनों में दोनों देशों के रिश्तों में लगातार गिरावट देखी गई है। अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका में प्रस्तावित जी-20 शिखर सम्मेलन का बहिष्कार किया, कई दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों को अमेरिकी बैठकों में आमंत्रित नहीं किया गया और राष्ट्रपति रामफोसा की व्हाइट हाउस यात्रा भी रिश्तों में आई खटास को कम नहीं कर सकी। इन घटनाक्रमों ने दोनों देशों के संबंधों को अभूतपूर्व तनाव की स्थिति में ला खड़ा किया है।


















