आल्हामाड़ा धाम में छेरता तिहार बना सांस्कृतिक एकता का उत्सव, प्रभारी मंत्री ने 40 लाख की घोषणा

आर स्टीफ़न

एमसीबी। छत्तीसगढ़ की समृद्ध, प्राचीन एवं गौरवशाली लोकसंस्कृति का जीवंत उत्सव छेरता तिहार इस वर्ष आल्हामाड़ा धाम, ग्राम पंचायत बंजी में अपार श्रद्धा, जनआस्था और सांस्कृतिक उल्लास के साथ ऐतिहासिक रूप से संपन्न हुआ। तीन दिवसीय यह महापर्व 03 से 05 जनवरी 2026 तक आयोजित हुआ, जिसने सामाजिक समरसता, जनजातीय चेतना और सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश दिया।

दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, जनजातीय समाज के लोग, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक प्रेमी आल्हामाड़ा धाम पहुंचे। पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों तथा ढोल-मांदर की गूंज से संपूर्ण क्षेत्र छत्तीसगढ़ी संस्कृति में रंगा नजर आया।

लोकनृत्य, खेल और परंपरा का संगम

छेरता तिहार के दौरान सुवा, सैला, कर्मा, लोकड़ी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां हुईं। वहीं कबड्डी प्रतियोगिता ने युवाओं में विशेष उत्साह का संचार किया। लोकसंस्कृति और खेलों के इस समन्वय ने पर्व को और अधिक जीवंत बना दिया।

जनप्रतिनिधियों की गरिमामय उपस्थिति

कार्यक्रम का शुभारंभ छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, जिला अध्यक्ष चंपादेवी पावले, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंती सिंह, जिला पंचायत सदस्य रामजीत लकड़ा, अनीता सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि मंचासीन रहे।

प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि “आल्हामाड़ा केवल तीर्थ नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र है।” उन्होंने आल्हामाड़ा धाम के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए मंच एवं सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 40 लाख रुपये की घोषणा की, जिस पर उपस्थित जनसमूह ने तालियों के साथ स्वागत किया।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छेरता पर्व अब पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक सौंदर्य से भी परिपूर्ण है। उन्होंने शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं—धान खरीदी, तेंदूपत्ता संग्रहण, महतारी वंदन योजना और श्रमिक कल्याण-की जानकारी साझा की।

सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम में बच्चों द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर दिए गए संदेशों की सराहना की गई। आयोजन समिति एवं बड़ादेव धाम समिति आल्हामाड़ा (बंजी) की सक्रिय भूमिका से यह आयोजन सुव्यवस्थित, सफल और स्मरणीय बना।

अंत में प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम एवं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कबड्डी प्रतियोगिता का अवलोकन कर महिला-पुरुष खिलाड़ियों से संवाद किया और ग्रामीण अंचलों में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने की शासन की प्रतिबद्धता दोहराई।

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