लखनऊ। उत्तर प्रदेश में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के कुशल मार्गदर्शन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अभिसरण से ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्रों का तेजी से निर्माण किया जा रहा है। इन नए भवनों ने न केवल गाँवों की सूरत बदली है, बल्कि बच्चों के सुरक्षित, स्वच्छ और शिक्षाप्रद वातावरण का नया अध्याय भी खोला है।
9,000 से अधिक नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण पूर्ण
राज्य सरकार की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2022-23 से अब तक कुल 9,071 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इन निर्माण कार्यों पर अब तक ₹26,122.42 लाख रुपये की धनराशि व्यय की गई है।
इन भवनों के निर्माण में स्थानीय मनरेगा श्रमिकों को कार्य उपलब्ध कराया गया, जिससे ग्रामीण परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ हुआ। यह न केवल ग्रामीण रोजगार सृजन का माध्यम बना बल्कि महिला एवं बाल विकास मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
हर गाँव में शिक्षा और सुरक्षा का नया केंद्र
नई आंगनबाड़ी इमारतें आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। इनमें बच्चों के लिए खेलने, अध्ययन और पोषण वितरण की उचित व्यवस्था की गई है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कोई भी आंगनबाड़ी केंद्र राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे न बने, ताकि बच्चों की सुरक्षा बनी रहे।
वर्षवार प्रगति (2022–2026)
2022-23: 2,330 केंद्र
2023-24: 1,981 केंद्र
2024-25: 3,192 केंद्र
2025-26: अब तक 1,568 केंद्र निर्माण पूर्ण, जबकि 7,809 कार्य प्रगतिशील हैं।
केवल चालू वित्तीय वर्ष (2025-26) में ही ₹8,687.49 लाख रुपये की धनराशि व्यय की जा चुकी है।
मनरेगा के अभिसरण से ग्रामीण विकास को नई दिशा
मनरेगा, बाल विकास विभाग और पंचायती राज विभाग के सफल अभिसरण (Convergence) ने ग्रामीण भारत के नौनिहालों के जीवन में आशा की किरण जगाई है।
कभी सीमित संसाधनों में पलने वाले बच्चे अब स्वच्छ, सुंदर और सुसज्जित भवनों में शिक्षा और पोषण प्राप्त कर रहे हैं।
यह पहल न केवल स्थानीय विकास का प्रतीक है, बल्कि यह सरकार की योजनाओं की जमीनी सफलता और पारदर्शिता का भी जीवंत उदाहरण बन चुकी है।


















