सीतापुर में जयगुरुदेव बाबा उमाकान्त जी महाराज का कार्तिक पूर्णिमा सतसंग संपन्न, लाखों श्रद्धालुओं ने पाया आत्मिक शांति का संदेश

शकील अहमद

सीतापुर। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित जयगुरुदेव बाबा उमाकान्त जी महाराज के सतसंग और नामदान कार्यक्रम का रविवार को भव्य समापन हुआ। सीतापुर के विशाल मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचे और गुरु भक्ति के सागर में डुबकी लगाई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था- आत्मिक शांति, नशामुक्त समाज और आध्यात्मिक जागृति का संदेश देना।

बाबा उमाकान्त जी महाराज, जो उज्जैन से पधारे थे, ने अपने प्रवचन में कहा कि “मनुष्य जीवन बहुत अनमोल है, इसे केवल भौतिक सुख-साधनों में व्यर्थ न करें। आत्मा की मुक्ति और सच्ची शांति केवल सत्संग, सुमिरन और सदाचारी जीवन से ही संभव है।”

गुरुजी के अनमोल वचन

बाबा उमाकान्त जी महाराज ने अपने उपदेश में कहा कि “हाथ जोड़ कर विनय हमारी, तजो नशा बनो शाकाहारी।” उन्होंने भक्तों से आग्रह किया कि वे शाकाहारी, नशामुक्त, सदाचारी और चरित्रवान बनें। उन्होंने कहा कि पराये धन और परायी नारी से दूर रहो, मेहनत और ईमानदारी से कमाई करो- यही सच्चा धर्म है।

गुरुजी ने बताया कि “जो लोग रोज़ 24 घंटे में से कम से कम 3 घंटे सुमिरन, ध्यान और भजन करते हैं, उनके जीवन का हर पहलू सुधर जाता है। उनकी टेंशन और तकलीफें स्वतः दूर होने लगती हैं।”

नामदान और आत्मकल्याण का संदेश

महाराजजी ने बताया कि “जिन्हें अभी तक नामदान नहीं मिला है, वे ‘जयगुरुदेव’ नामध्वनि का जाप रोज़ सुबह-शाम एक घंटे करें। यह नाम प्रभु का जगाया हुआ नाम है, जो हर संकट में मददगार साबित होता है।” उन्होंने कहा कि “जो भी व्यक्ति शाकाहारी, नशामुक्त और सदाचारी है, वह एक बार इस नाम की शक्ति को स्वयं अनुभव करे। संसारिक जीवन के साथ-साथ आत्मा के कल्याण का उपाय भी अभी इसी जीवन में करना चाहिए, वरना समय निकल जाएगा।”

भव्य आयोजन और आपसी सद्भाव की मिसाल

पूरे परिसर में भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनियों से वातावरण गुंजायमान रहा। लाखों श्रद्धालुओं ने शांत भाव से प्रवचन सुने और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। गुरु महाराज ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी कार्यकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, स्थानीय नागरिकों और राजनेताओं का आभार व्यक्त किया।

कार्तिक पूर्णिमा के इस पवित्र अवसर पर बाबा उमाकान्त जी महाराज का संदेश समाज में नशामुक्ति, अहिंसा, ईमानदारी और आध्यात्मिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि मानवीय और सामाजिक चेतना को जगाने वाला उत्सव बन गया।

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