आर स्टीफ़न (स्टेट हेड)
छत्तीसगढ़ (एमसीबी, चिरमिरी)। चिरमिरी पुलिस की हालिया कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में सवाल उठने लगे हैं। एक आदिवासी महिला को कथित तौर पर रात भर थाने में बैठाए जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में नाराज़गी देखी जा रही है और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि चिरमिरी क्षेत्र में अवैध शराब, जुआ, सट्टा और कबाड़ के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने हाल के दिनों में सख्त अभियान चलाया है।
इन कार्रवाइयों के कारण अपराधी तत्वों पर काफी हद तक अंकुश लगा है और आम नागरिकों में पुलिस की छवि सकारात्मक बनी थी। लेकिन हाल की एक घटना ने पुलिस की कार्यशैली को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है।
महिला को रात भर थाने में बैठाने का आरोप
सूत्रों के अनुसार पुलिस ने सुबह लगभग 8 से 9 बजे के बीच एक महिला को 10 से 15 लीटर अवैध महुआ शराब के साथ पकड़ा था और उसे थाने लाया गया था। बताया जा रहा है कि उक्त महिला दोपहर करीब 3 बजे तक अपने घर वापस पहुंच गई।
वहीं दूसरी ओर एक आदिवासी महिला को दोपहर लगभग 3 बजे उसके घर से महुआ शराब रखने के आरोप में चिरमिरी थाना लाया गया। आरोप है कि उस महिला को पूरी रात थाने में बैठाए रखा गया और अगले दिन उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया।
कानून और कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय को पारंपरिक उपयोग के लिए सीमित मात्रा में महुआ शराब बनाने और रखने की अनुमति है। ऐसे में यदि महिला के घर से लगभग 7 लीटर महुआ शराब जब्त हुई, तो उस पर इतनी कड़ी कार्रवाई क्यों की गई, जबकि दूसरी महिला के पास अधिक मात्रा में शराब होने के बावजूद उसे छोड़ दिया गया।
इस घटना के बाद लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या कानून किसी महिला को रात भर थाने में बैठाने की अनुमति देता है और क्या इस मामले में कार्रवाई निष्पक्ष थी।
सामाजिक संगठनों ने उठाई आवाज
मामले को लेकर कुछ सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई में पक्षपात हुआ है तो इसकी जांच होनी चाहिए। बताया जा रहा है कि इस संबंध में पुलिस के उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की भी तैयारी की जा रही है।
पुलिस की भूमिका पर चर्चा
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चिरमिरी पुलिस ने पिछले समय में अवैध कारोबार के खिलाफ कई प्रभावी कदम उठाए हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं पुलिस की छवि को प्रभावित करती हैं। लोगों का मानना है कि कानून की कार्रवाई सभी के लिए समान और पारदर्शी होनी चाहिए।


















