मिशन शक्ति 5.0 के तहत रायबरेली में महिलाओं को लैंगिक उत्पीड़न के प्रति किया गया जागरूक

रायबरेली। प्रदेश में महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संचालित “मिशन शक्ति 5.0” के अंतर्गत जनपद रायबरेली में 100 दिवसीय विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जिलाधिकारी हर्षिता माथुर के निर्देशानुसार यह कार्यक्रम जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा के नेतृत्व में संचालित किए जा रहे हैं।

इसी क्रम में विकास भवन स्थित महात्मा गांधी सभागार में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ लैंगिक उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम–2013 पर आधारित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं को कार्यस्थल पर गरिमा के साथ कार्य करने का अधिकार, लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण तथा आंतरिक परिवाद समिति (ICC) के गठन से संबंधित नियमों की विस्तृत जानकारी दी गई।

कानूनी अधिकारों और योजनाओं की जानकारी
जिला प्रोबेशन अधिकारी जयपाल वर्मा ने कहा कि महिलाओं के प्रति सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए यह अधिनियम अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्यस्थल पर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और कानूनी संरक्षण के प्रावधानों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर जिला मिशन समन्वयक शेफाली सिंह ने महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी, जिनमें मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, पति की मृत्यु उपरांत निराश्रित महिला पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन प्राप्त कर रही महिला की पुत्री विवाह सहायता, दहेज के कारण परित्यक्त महिलाओं को आर्थिक एवं कानूनी सहायता, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, स्पॉन्सरशिप योजना,बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ, घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम–2005 व बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम–2006 शामिल हैं।

टोल फ्री हेल्पलाइन नंबरों की दी गई जानकारी

कार्यक्रम में जेंडर स्पेशलिस्ट पूजा तिवारी द्वारा महिलाओं और बच्चों की सहायता हेतु विभिन्न टोल फ्री नंबरों की जानकारी दी गई, जिनमें 1930 – साइबर हेल्पलाइन, 112 – आपातकालीन पुलिस सेवा, 108 – एंबुलेंस सेवा, 1098 – चाइल्ड हेल्पलाइन, 181 – विमेंस हेल्पलाइन, 1090 – वूमेन पावर लाइन, 1076 – मुख्यमंत्री हेल्पलाइन व 101 – अग्निशमन सेवा
शामिल हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित महिलाओं ने इस जागरूकता पहल की सराहना करते हुए इसे सुरक्षित और सम्मानजनक कार्यस्थल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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