लखनऊ। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग (डीआईबीडी) ने 20 जनवरी 2026 को लखनऊ में आयोजित उत्तर प्रदेश एआई नवाचार एवं क्षमता निर्माण सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन का आयोजन उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के ई-गवर्नेंस केंद्र (सीईजी) द्वारा किया गया।
सम्मेलन में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, भारत सरकार के प्रतिनिधि, उद्योग भागीदार और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। चर्चा का केंद्र राज्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने, डिजिटल कौशल विकास और नवाचार क्षमता को सुदृढ़ करने से जुड़े विषय रहे।
कार्यक्रम के अंतर्गत एआई अनुप्रयोगों, उद्योग सहयोग, कौशल विकास पहलों और राज्य स्तरीय एआई कार्यक्रमों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें फ्यूचरस्किल्स प्राइम कार्यक्रम और एआई प्रज्ञा पहल शामिल रहीं, जिनका उद्देश्य जिम्मेदार और व्यापक एआई अपनाने के लिए संस्थागत तथा मानवीय क्षमता का निर्माण करना है।
एक विशेष तकनीकी सत्र भाषिनी प्लेटफॉर्म और बहुभाषी एवं ध्वनि-प्रधान डिजिटल शासन को सक्षम बनाने में इसकी भूमिका पर केंद्रित रहा। सत्र में नागरिक-केंद्रित सेवाओं और प्रशासनिक कार्यप्रवाहों में एकीकरण के लिए अनुवाद एपीआई, स्वचालित वाक् पहचान, पाठ-से-भाषण और संवादात्मक एआई उपकरणों के उपयोग पर जानकारी दी गई, ताकि विभिन्न भाषाई समूहों के लिए डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं तक समावेशी पहुंच सुनिश्चित की जा सके।
सत्र के दौरान भाषिनी के वाक्-से-पाठ और अनुवाद उपकरण ‘श्रुतलेख’ का लाइव प्रदर्शन किया गया, जिसमें शासन संबंधी उपयोगों के लिए वास्तविक समय प्रतिलेखन और बहुभाषी अनुवाद की क्षमताओं को प्रदर्शित किया गया।
इस अवसर पर अमिताभ नाग मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन ने “एआई-आधारित, वॉइस-फर्स्ट, बहुभाषी प्लेटफॉर्म के सह-निर्माण में अनुभवों को साझा करना” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता तभी प्रभावी ढंग से नागरिकों की सेवा कर सकती है, जब वह भारतीय भाषाओं को समझे और स्थानीय संदर्भों तथा उपयोग को दर्शाने वाले स्वदेशी डेटा पर प्रशिक्षित हो।
प्रस्तुति में बताया गया कि भाषिनी का दृष्टिकोण भारतीय भाषाई वास्तविकताओं पर आधारित बहुभाषी एआई क्षमता निर्माण पर केंद्रित है। इसके तहत स्टार्टअप, शिक्षा जगत और उद्योग के सहयोग से भाषा डेटा योगदान और सत्यापन में नागरिकों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। क्षमता निर्माण एआई जीवनचक्र के सभी चरणों डेटा निर्माण, व्याख्या, वास्तविक दुनिया में तैनाती और फीडबैक में समाहित है।
भाषिनी प्लेटफॉर्म के परिचालन पैमाने पर जानकारी देते हुए बताया गया कि यह लिखित पाठ में 36 से अधिक भाषाओं और आवाज में 22 से अधिक भाषाओं का समर्थन करता है। इसके अंतर्गत 350 से अधिक एआई भाषा मॉडल उपलब्ध हैं, जो 500 से अधिक वेबसाइटों और 100 से अधिक लाइव उपयोग मामलों में एकीकृत किए जा चुके हैं। अवधी और ब्रज जैसी क्षेत्रीय बोलियों का भी कवरेज किया गया है।
डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग की इस सहभागिता ने राज्य सरकारों को बहुभाषी, ध्वनि-आधारित और एआई-संचालित समाधानों के कार्यान्वयन में सहयोग देने की उसकी भूमिका को रेखांकित किया। यह पहल भारत सरकार के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में भारतीय भाषाओं को एकीकृत करने और राज्यों में समावेशी एआई-सक्षम शासन को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।


















