रायबरेली में विटामिन ए अभियान शुरू, 3.28 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी दवा

  • नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों के लिए 28 जनवरी 2026 तक चलेगा अभियान

रायबरेली। जनपद में विटामिन ए सम्पूरण कार्यक्रम शुरू किया गया है जो कि 28 जनवरी 2026 तक चलेगा। इसके तहत नौ माह से पांच साल तक की आयु के बच्चों को विटामिन ए की दवा पिलाई जाएगी। इसी क्रम में जिला महिला अस्पताल स्थित प्रसव पश्चात केंद्र(पीपीसी), मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सलोन में उप जिलाधिकारी चन्द्रप्रकाश ने फीता काटकर बच्चे को विटामिन ए की दवा पिलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके साथ ही सीएचसी बछरावां में चिकित्सा अधीक्षक डॉ अर्पिता श्रीवास्तव द्वारा शुभारम्भ किया गया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यह कार्यक्रम साल में दो बार, जुलाई-अगस्त तथा दिसम्बर-जनवरी में आयोजित होता है। इस बार इस अभियान में नौ माह से पांच साल तक की आयु के 3.28 लाख बच्चों को विटामिन ए की दवा पिलाने का लक्ष्य है। नौ से 12 माह के 37,421, एक से दो साल की आयु के 71,314 तथा दो से पांच साल की आयु के कुल 2.19 लाख बच्चे हैं।

उप जिलाधिकारी सलोन ने कहा कि बच्चों का स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।विटामिन ए सम्पूरण कार्यक्रम की बच्चों को कुपोषण, अंधेपन और संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अपील की कि अभिभावक नौ माह से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को निर्धारित सत्रों पर विटामिन ए की खुराक अवश्य पिलवाएं।

शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल डॉ राकेश कुमार यादव ने बताया कि कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के साथ आईसीडीएस सहयोग कर रहा है। इसको लेकर सभी को प्रशिक्षित किया जा चुका है। दवा का सेवन एएनएम द्वारा ग्राम्य स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) पर कराया जायेगा। इसके साथ ही एमआर (मीजल्स–रूबेला) सहित नियमित टीकाकरण किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि विटामिन ए की बोतल खोलने के बाद आठ सप्ताह तक ही इसका उपयोग करना है। बोतल खोलने की तारीख़ लिखें और इसे सीधी धूप से बचाना है। दवा समुचित मात्रा में उपलब्ध है। विटामिन ए सम्पूरण कार्यक्रम के सत्रों की निगरानी जिला एवं ब्लाक स्तरीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा की जायेगी।

जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस. अस्थाना ने बताया कि विटामिन ए आँखों की रौशनी, रोग प्रतिरोधक क्षमता और बच्चों की वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह हड्डियों की मजबूती और सही विकास के लिए आवश्यक है। शरीर की कोशिकाओं को सही रूप से विकसित करने में मदद करता है जिससे कि सांस की नली और आंतें ठीक से काम करती हैं।

यह त्वचा को स्वस्थ बनाता है। दस्त और खसरे से होने वाली मौतों को कम करता है। विटामिन ए की कमी से रतौंधी, बिटोट्स स्पॉट्स तथा कोर्निया में घाव हो सकता है।बच्चों में अंधेपन का एक मुख्य कारण है जो कि रोका जा सकता है। अभियान के दौरान विटामिन ए की दवा पिलाने के साथ ही नियमित टीकाकरण कराने, केवल स्तनपान कराने और छह माह के बाद बच्चे को ऊपरी आहार शुरू करने की सलाह दी जाएगी।

इसके साथ ही स्वास्थ्य कार्यकर्ता आहार विविधता को लेकर भी समुदाय को जागरूक करेंगे क्योंकि बच्चे को संतुलित आहार देने से विटामिन ए की कमी को रोका जा सकता है। विटामिन ए पीले व नारंगी फलों तथा सब्जियों जैसे गाजर, आम, पपीता, पालक आदि हैं।

इस मौके पर जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. निर्मला साहू, उप जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अंजलि सिंह, अंकित मौर्य, वन्दना त्रिपाठी, डीएमसी यूनिसेफ श्रेया श्रीवास्तव, जिला कोआर्डिनेटर सहाना जमीर, तारा देवी, नीतू पाल तथा अस्पताल के अधिकारी व कर्मचारी सहित लाभार्थीगण मौजूद रहें।

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