- ग्रामीणों का आरोप- सफाई कर्मी रहता है नदारद, शिकायत पर ग्राम प्रधान के अभद्र व्यवहार से बढ़ा आक्रोश
रायबरेली। एक ओर केंद्र और प्रदेश सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर खीरों विकासखंड की ग्राम सभा पहरौली उर्फ रनापुर में इस अभियान की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गांव की अधिकांश नालियां पिछले लंबे समय से गंदगी से अटी पड़ी हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में तैनात सफाई कर्मी अधिकतर समय नदारद रहता है और अपनी मनमर्जी से काम करता है। नियमित सफाई न होने के कारण नालियों में गंदगी और कचरे का अंबार लगा हुआ है। हालत यह है कि कई जगह नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे दुर्गंध फैल रही है और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या की शिकायत ग्राम प्रधान लखन सैनी से की, लेकिन समाधान के बजाय उन्हें अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने पर ग्राम प्रधान गंभीरता से सुनने के बजाय नाराजगी जाहिर करते हैं, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि बीते वर्ष भी गंदगी की स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि आसपास रहने वाले लोगों को मजबूर होकर खुद ही नालियों की सफाई करनी पड़ी थी। इसके बावजूद न तो सफाई व्यवस्था में कोई सुधार हुआ और न ही जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की गई।
अब बरसात का मौसम सिर पर है और गांव में गंदगी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई नहीं कराई गई, तो जलभराव के साथ-साथ मच्छरों और संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव की सफाई व्यवस्था की जांच कराई जाए और नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए, ताकि स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य धरातल पर भी दिखाई दे सके। आखिर सवाल यह है कि जब सरकार गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए अभियान चला रही है, तो जिम्मेदार लोग उसकी मंशा पर पानी क्यों फेर रहे हैं?













