आर. स्टीफन (स्टेट हेड)
कोरिया (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा धान खरीदी केंद्रों पर निर्धारित व्यवस्थाओं के बावजूद कोरिया जिले के अंतर्गत स्थित जिल्दा धान खरीदी केंद्र में किसानों को मजदूरों की सुविधा न मिलने का मामला सामने आया है।
किसानों का आरोप है कि केंद्र पर शासन के निर्देशों के विपरीत उनसे स्वयं धान उतरवाने, रखने और वजन कराने का कार्य कराया जा रहा है।
किसानों ने मीडिया को बताया कि धान खरीदी केंद्रों पर मजदूरों की व्यवस्था शासन द्वारा की जाती है, लेकिन जिल्दा केंद्र पर मौजूद मजदूरों के बावजूद उनसे कार्य नहीं लिया जा रहा।
किसानों का कहना है कि केंद्र प्रभारी द्वारा मजदूरों का भुगतान लेकर किसानों से ही पूरा काम कराया जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आर्थिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि धान की प्रत्येक बोरी में निर्धारित मात्रा से अधिक वजन लिया जा रहा है। किसानों के अनुसार कई बोरियों में 41 किलो 200 ग्राम से लेकर 41 किलो 300 ग्राम तक धान भरा जा रहा है, जबकि शासन की गाइडलाइन के अनुसार बोरी का वजन इससे कम होना चाहिए।
इस संबंध में जब धान केंद्र पर उपस्थित अधिकृत अधिकारी भैयालाल से पूछा गया कि प्रति बोरी अतिरिक्त वजन क्यों लिया जा रहा है और क्या यह शासन की गाइडलाइन के अंतर्गत आता है, तो उन्होंने इसे गलत बताया।
हालांकि किसानों का कहना है कि मौके पर कराए गए वजन में कई बोरियों में अतिरिक्त वजन पाया गया।
वहीं जब इस पूरे मामले को लेकर समिति प्रभारी सुकेश कुमार साहू से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो वे मीडिया के सामने आने से बचते नजर आए और स्पष्ट जवाब देने से कतराते रहे। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से लंबे समय से धान खरीदी में अनियमितताएं की जा रही हैं।
किसानों ने मांग की है कि शासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों के अधिकारों की रक्षा हो सके।
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक जांच या कार्रवाई की पुष्टि नहीं की गई है।


















