रायबरेली। राष्ट्रीय फाइलेरिया दिवस के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्र के निर्देशन में जिला मलेरिया अधिकारी रमेश चंद्र यादव के नेतृत्व में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।कार्यक्रम का उद्देश्य फाइलेरिया रोग की रोकथाम, पहचान और उपचार के प्रति जनमानस को जागरूक करना था।
एएनएम सेंटर में संगोष्ठी और प्रश्नोत्तर सत्र
कार्यालय मुख्य चिकित्सा अधिकारी परिसर स्थित एएनएम सेंटर में आयोजित संगोष्ठी में सीनियर मलेरिया निरीक्षक प्रदीप कुमार मिश्र, मलेरिया निरीक्षक चंदन, सुमित, आतिफ, नीलम मौर्या, वरिष्ठ लैब तकनीशियन राजेश मिश्र एवं लैब टेकनीशियन अरविंद मिश्र सहित स्वास्थ्य कर्मियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में फाइलेरिया रोग के कारण, लक्षण, जांच, उपचार और बचाव पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही पोस्टर, पैम्फलेट वितरण, मौखिक प्रश्नोत्तर प्रतियोगिता और जनजागरूकता अभियान के माध्यम से आमजन को इस गंभीर बीमारी से बचाव के उपाय बताए गए।
फाइलेरिया रोकथाम पर विस्तृत जानकारी
जिला मलेरिया अधिकारी रमेश चंद्र यादव ने बताया कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलने वाला संक्रामक रोग है। इसका परजीवी वुचरेरिया बैंक्रॉफ्टी होता है।
इस रोग में हाथ, पैर, स्तन, अंडकोष में सूजन आ जाती है और काइलुरिया (पेशाब में सफेद द्रव) जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
उन्होंने बताया कि रोग के लक्षण आने में 5 से 15 वर्ष तक लग सकते हैं, और एक बार स्थायी सूजन आने के बाद यह लाइलाज हो सकता है।
फाइलेरिया से बचाव के लिए महत्वपूर्ण सलाह
वर्ष में एक बार डी.ई.सी. और एल्बेंडाजोल की खुराक अवश्य लें। मच्छरों से बचाव करें, घरों में जल जमाव न होने दें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और मच्छरदानी में सोएं। हाथ-पैर या शरीर में सूजन महसूस होने पर तुरंत फाइलेरिया क्लिनिक या सरकारी चिकित्सक से संपर्क करें।
जिले में उपचार और जांच सुविधा
रायबरेली में अब तक 8232 फाइलेरिया लिम्फोडिमा मरीजों को रुग्णता प्रबंधन और दिव्यांगता रोकथाम के तहत MMDP किट प्रदान की जा चुकी है। साथ ही पुलिस लाइन मटिहा स्थित फाइलेरिया क्लिनिक में प्रत्येक मंगलवार को निःशुल्क रात्रिकालीन जांच शिविर आयोजित किया जाता है।


















