स्वास्थ्य महकमे के मुंह पर कालिख पोत रहे जिम्मेदार

  • पूरे जनपद में फैला अवैध अस्पतालों का मकड़जाल
  • जिम्मेदार एसीएमओ डॉ.अंबिका प्रकाश श्रीवास्तव पर कब होगी कार्रवाई

रायबरेली। शहर में बिना पंजीकरण चलाए जा रहे शाश्वत नर्सिंग होम में प्रतापगढ़ जनपद के पूरे बोधी सिंह के शरद कुमार सिंह की 10 वर्षीय बेटी शिवानी की टॉन्सिल के ऑपरेशन के दौरान हालत बिगड़ने और बाद में लखनऊ में इलाज के दौरान मौत हो जाने के मामले ने जिले में भ्रष्टाचार का खुला खेल रहे स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों की असलियत खोल कर रख दी है।

घोर अनियमितता और लापरवाही के इस मामले में हमेशा की तरह सीएमओ डॉक्टर नवीन चंद्रा और एसीएमओ डॉक्टर अंबिका प्रकाश श्रीवास्तव ने मामले को ले-देकर रफा-दफा करने का भरपूर प्रयास किया पर पूरे जनपद में मामले को लेकर बढ़ते जनाक्रोश के सामने दोनों अधिकारियों को घुटने टेकने पड़े।

जिलाधिकारी सरनीत कौर ब्रोका के हस्तक्षेप के बाद स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी 10 वर्षीय बेटी शिवानी के पिता शरद कुमार सिंह की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने डॉ.अमित सिंह, डॉ. निशांत सिंह व तीन अज्ञात समेत कुल पांच आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

घटना को लेकर पूरे जनपद में जनाक्रोश चरम पर है। लोग इस मामले में दोषी डॉक्टर व स्टॉफ के साथ ही सीएमओ नवीन चंद्रा और अवैध नर्सिंग होम, हॉस्पिटल व झोलाछाप मामले के नोडल अधिकारी, एसीएमओ डॉ.अंबिका प्रकाश श्रीवास्तव के विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जिले में अवैध पैथोलॉजी, अवैध नर्सिंग होम व क्लिनिक को लेकर आए दिन शिकायतें होती रहती हैं।

अधिकांश सीएचसी अधीक्षक दोषियों से पैसा लेकर खुलेआम अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में नियम-कानून ताक पर रख गैरकानूनी तरीके से अवैध पैथोलॉजी, नर्सिंग होम और अस्पतालों का संचालन करवा रहे हैं। मामले के नोडल अधिकारी व एसीएमओ डॉ. अंबिका प्रकाश श्रीवास्तव की इसमें संलिप्तता है। हर महीने वसूली जा रही मोटी रकम का हिस्सा एसीएमओ और सीएमओ को पहुंचता है। यह बात किसी से छिपी नहीं है।

सीएमओ डॉक्टर नवीन चंद्रा का रिटायरमेंट बिल्कुल करीब है। इसी के चलते दोनों हाथों से जिले को लूटने में लगे हैं। पूरे जनपद में बिना प्रपत्रों के अवैध तरीके से संचालित किए जा रहे और मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे सैकड़ों अवैध नर्सिंग होम इसकी गवाही दे रहे हैं। जिला अस्पताल समेत जिले की अधिकांश सीएचसी के दर्जनों डॉक्टर अपना निजी नर्सिंग होम संचालित कर रहे हैं या किसी निजी नर्सिंग होम से अटैच हैं।

सीएचसी में बायोमेट्रिक हाजिरी का अनुपालन नहीं हो रहा है। अधिकांश डॉक्टर व अन्य स्टॉफ सरकारी अस्पतालों से नदारद रहते हैं। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के दुरुस्त होने का दावा करते स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक की आखिर रायबरेली में क्यों नहीं चल रही है?

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