रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग: 24,000 करोड़ तक पहुंचा रक्षा निर्यात, नागपुर में नई गोला-बारूद यूनिट का उद्घाटन

नागपुर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की गोला-बारूद निर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने और भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक उत्पादन केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता को दोहराया है।

19 जनवरी 2026 को नागपुर में सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड की मध्यम कैलिबर गोला-बारूद निर्माण सुविधा का उद्घाटन करते हुए उन्होंने उस दौर को याद किया, जब गोला-बारूद की कमी के कारण देश की रक्षा तैयारियों पर असर पड़ता था और इसी अनुभव से आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता स्पष्ट हुई।

रक्षा मंत्री द्वारा उद्घाटन किया गया यह संयंत्र पूरी तरह से स्वचालित है, जहां 30 मिमी गोला-बारूद का निर्माण किया जाएगा, जिसका उपयोग भारतीय सेना और भारतीय नौसेना द्वारा बड़े पैमाने पर किया जाता है। कार्यक्रम के दौरान श्री राजनाथ सिंह ने पिनाका रॉकेट निर्माण संयंत्र का भी दौरा किया और निर्देशित पिनाका रॉकेटों की पहली खेप को आर्मेनिया के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

रक्षा मंत्री ने रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में निजी क्षेत्र की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण और विश्वसनीय गोला-बारूद निर्माण के कारण भारत इस क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है। उन्होंने वर्ष 2021 का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भारतीय सेना को निजी क्षेत्र द्वारा निर्मित पूर्णतः स्वदेशी गोला-बारूद मल्टी-मोड हैंड ग्रेनेड सौंपे गए, तब यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

उन्होंने सोलर ग्रुप द्वारा निर्मित नागास्त्र ड्रोन का भी उल्लेख किया, जिसका उपयोग ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सफलतापूर्वक किया गया। इस ड्रोन ने आतंकवादी ठिकानों पर सटीक प्रहार कर अपनी रणनीतिक क्षमता सिद्ध की। रक्षा मंत्री ने नागास्त्र के और अधिक उन्नत संस्करणों के विकास की सराहना करते हुए कहा कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर ये हथियार देश के शत्रुओं के लिए अत्यंत घातक साबित होंगे।

श्री राजनाथ सिंह ने सोलर कंपनी द्वारा विकसित किए जा रहे ‘भार्गवस्त्र’ काउंटर ड्रोन सिस्टम के सफल परीक्षण को निजी क्षेत्र की तकनीकी क्षमता का प्रमाण बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस संयंत्र में विकसित पिनाका मिसाइलों का निर्यात शुरू हो चुका है, जो भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को मजबूत करता है। उनके अनुसार, भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं रहा, बल्कि तेजी से एक निर्यातक देश के रूप में उभर रहा है।

रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर को राष्ट्र के लिए आत्मनिर्भरता के महत्व का जीवंत उदाहरण बताते हुए कहा कि युद्ध की प्रकृति लगातार बदल रही है। अब युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि ऊर्जा, व्यापार, शुल्क, आपूर्ति श्रृंखला, प्रौद्योगिकी और सूचना जैसे क्षेत्र भी संघर्ष के नए आयाम बन चुके हैं।

ऐसे परिदृश्य में सीमा सुरक्षा, आधुनिक हथियारों और उन्नत तकनीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध चाहे किसी भी स्वरूप का हो, एक मजबूत रक्षा औद्योगिक आधार की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है, और इसी कारण विनिर्माण तथा अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी समय की मांग है।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में रक्षा विनिर्माण में निजी क्षेत्र की भूमिका को 50 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंचाना है। उन्होंने विश्वास जताया कि निजी क्षेत्र की क्षमताएं और नवाचार इस लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र को मजबूत करने और घरेलू विक्रेताओं को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

प्लेटफॉर्म, सिस्टम और सब-सिस्टम को चरणबद्ध रूप से स्वदेशी बनाने का निर्णय लिया गया है, और जिन वस्तुओं का पूर्ण निर्माण देश में संभव नहीं है, उनमें भी न्यूनतम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।

रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भरता की दिशा में सरकार के प्रयासों से प्राप्त परिणामों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2014 में घरेलू रक्षा उत्पादन जहां मात्र 46,425 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

इस कुल उत्पादन में 33,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान निजी क्षेत्र का है, जो दर्शाता है कि निजी उद्योग आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के कारण भारत का रक्षा निर्यात, जो एक दशक पहले 1,000 करोड़ रुपये से कम था, अब रिकॉर्ड 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

रक्षा मंत्री ने रक्षा विनिर्माण प्रणाली में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के अनूठे और प्रभावी संयोजन को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि दोनों क्षेत्रों को एक-दूसरे का पूरक बनकर काम करना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि सार्वजनिक क्षेत्र के अनुभव और निजी क्षेत्र की नवाचार क्षमता का समन्वय राष्ट्रीय हित में किया जाना आवश्यक है।

इस अवसर पर रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह तथा सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

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