कोलकाता सीईओ कार्यालय की सुरक्षा में तैनात होंगे केंद्रीय बल, एसआईआर के विरोध के बीच चुनाव आयोग का फैसला

बंगाल बीएलओ का विरोध: राज्य चुनाव निकाय के कार्यालय की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल; केंद्र सरकार ने चुनाव आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दी

 बीएलओ के लगातार विरोध के बाद सीईओ कार्यालय की सुरक्षा बढ़ाई गई

मतदाता सूची सत्यापन में गड़बड़ी पर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया

नई दिल्ली / कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बढ़ते तनाव और विरोध प्रदर्शनों के बीच कोलकाता स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र बल तैनात किए जाएंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय ने इस संबंध में चुनाव आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

अधिकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह से केंद्रीय बल के जवान सीईओ कार्यालय की दूसरी और तीसरी मंजिल पर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेंगे। इसके अलावा, जब सीईओ कार्यालय के अधिकारी सरकारी वाहनों से बाहर यात्रा करेंगे, तो केंद्रीय बल उनके साथ मौजूद रहेंगे।

यह निर्णय उस समय लिया गया है, जब बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के बैनर तले बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) कोलकाता में सीईओ कार्यालय के बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। बीएलओ का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत उन पर अत्यधिक और अमानवीय कार्यभार डाला जा रहा है। कई बार धरना-प्रदर्शन के दौरान परिसर की सुरक्षा को लेकर भी चिंता सामने आई है।

प्रदर्शन उस समय और तेज हो गया, जब उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में एसआईआर ड्यूटी के दौरान बीएलओ की मौत की खबरें सामने आईं। मृतक कर्मचारियों के परिजनों और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया कि ये मौतें कार्य के अत्यधिक दबाव से जुड़ी हैं, हालांकि चुनाव आयोग और प्रशासन ने इस दावे से इनकार किया है।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अगले वर्ष अप्रैल–मई में प्रस्तावित हैं, ऐसे में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टि पर नोटिस

इस बीच चुनाव आयोग ने गुरुवार को एक मतदाता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जांच में पाया गया कि उस व्यक्ति का नाम दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों कोलकाता उत्तर के श्यामपुकुर और उत्तर 24 परगना के अशोकनगर में दर्ज है।
एक स्थान पर मतदाता ने स्वयं फॉर्म पर हस्ताक्षर किए थे, जबकि दूसरे स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर पाए गए।

एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला पते में बदलाव से जुड़ा हो सकता है, लेकिन तथ्यों की पुष्टि के लिए नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, बीएलओ और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

चुनाव आयोग के अनुसार, यह कदम एसआईआर प्रक्रिया में निगरानी को मजबूत करने और किसी भी प्रशासनिक चूक को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

Share this article

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts