अनधिकृत टी20 लीग पर टीसीए का ऐतराज, एचसीए के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचा मामला

हैदराबाद। तेलंगाना क्रिकेट में लंबे समय से जारी प्रशासनिक खींचतान बुधवार को एक नए मोड़ पर पहुंच गई, जब तेलंगाना क्रिकेट एसोसिएशन (TCA) ने हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन (HCA) के तत्वावधान में प्रस्तावित अंतर-जिला टी20 लीग के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। टीसीए ने 29 दिसंबर से शुरू होने वाली ‘जी वेंकट स्वामी मेमोरियल अंतर-जिला टी20 लीग’ को अनधिकृत बताते हुए उस पर तत्काल रोक की मांग की है।

न्यायमूर्ति तुकाराम की उच्च न्यायालय पीठ के समक्ष टीसीए की ओर से वरिष्ठ वकील राजा श्रीपति राव और एसोसिएशन के अधिवक्ता एस. सुरेंद्र रेड्डी ने दलील दी कि यह टूर्नामेंट भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के 11 जुलाई 2021 के निर्देशों का उल्लंघन है। उन निर्देशों के अनुसार, जिलों से जुड़े किसी भी क्रिकेट कार्यक्रम के संचालन से पहले एचसीए को टीसीए से समन्वय करना अनिवार्य है।

टीसीए ने अदालत को बताया कि एचसीए ने बीसीसीआई से आवश्यक अनुमति नहीं ली, जबकि नियमों के अनुसार किसी भी प्रतियोगिता के आयोजन से कम से कम 45 दिन पहले अनुमति लेना जरूरी होता है। इसी आधार पर टीसीए ने लीग को “अनधिकृत” घोषित करने और उस पर रोक लगाने की मांग की।

जिलों के चयन पर भी सवाल

टीसीए ने यह मुद्दा भी उठाया कि 33 में से केवल 29 जिलों को ही टीमें उतारने की अनुमति दी जा रही है, जो बीसीसीआई के आदेशों की भावना के विपरीत है। संगठन ने सवाल किया कि हैदराबाद और आरआर जिले के खिलाड़ियों को इस टूर्नामेंट से बाहर क्यों रखा जा रहा है, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं मिल पा रहा।

हितों के टकराव का आरोप

याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि टूर्नामेंट के संभावित प्रायोजक विसाका इंडस्ट्रीज से जुड़ा मामला हितों के टकराव का है। कंपनी एचसीए के साथ वित्तीय मध्यस्थता विवाद में फंसी हुई है और भुगतान लंबित बताया गया है। टीसीए के अनुसार, ऐसी स्थिति में किसी भी एचसीए प्रतियोगिता का प्रायोजन नियमों के अनुरूप नहीं है।

29 दिसंबर पर टिकी निगाहें

बीसीसीआई की ओर से अदालत में पेश वकील ने समय मांगा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि 29 दिसंबर तक टीसीए के प्रतिवेदन पर क्या निर्णय लिया जा सकता है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि उसी दिन इस पूरे विवाद पर स्थिति साफ हो सकती है।

टीसीए ने दोहराया कि या तो प्रस्तावित टी20 लीग को तुरंत रोका जाए या बीसीसीआई इसे अनधिकृत घोषित कर एचसीए को कड़ी चेतावनी दे। क्रिकेट जगत की नजरें अब 29 दिसंबर पर टिकी हैं, जिसे तेलंगाना क्रिकेट के भविष्य के लिए निर्णायक दिन माना जा रहा है।

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