- उत्कल समाज के पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ निकली रथ यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने खींचा रथ, जगह-जगह भंडारे और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
आर. स्टीफन स्टेट हेड, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़। कोलांचल नगरी चिरमिरी स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आषाढ़ माह के पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ निकाली गई। स्थानीय लोग इस यात्रा को गुंडिचा यात्रा के नाम से भी जानते हैं। रथ यात्रा में शामिल होने के लिए चिरमिरी सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

रथ यात्रा प्रारंभ होने से पूर्व मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की सुसज्जित प्रतिमाओं का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद तीनों विग्रहों को पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भव्य रथ पर विराजमान कराया गया। जैसे ही रथ यात्रा शुरू हुई, “जय जगन्नाथ” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
उत्कल समाज चिरमिरी के सदस्यों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के बीच श्रद्धालुओं के साथ मिलकर रथ को खींचा। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। पूरे मार्ग में भक्तों ने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
रथ यात्रा के अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना एवं भंडारे का आयोजन किया गया। वहीं विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं समाजसेवी संस्थाओं द्वारा यात्रा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं के लिए शीतल पेयजल, शरबत एवं अन्य जलपान की व्यवस्था की गई।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा पूरे रूट पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासन ने यात्रा को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए आवश्यक प्रबंध किए।
चिरमिरी का श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, धार्मिक महत्व और प्राचीन प्रतिमाओं के कारण विशेष पहचान रखता है। यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भाईचारे, सामाजिक समरसता और आस्था का प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष हजारों श्रद्धालु इस पावन यात्रा में शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को निकाली जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं।
रथ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने भी मीडिया के माध्यम से भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए इस यात्रा के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर अपने विचार साझा किए। चिरमिरी की यह ऐतिहासिक रथ यात्रा हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम बनकर सामने आई।













