रायबरेली। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ तथा माननीय जनपद न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायबरेली के दिशा-निर्देशन में जिला कारागार रायबरेली में बंदियों के विधिक अधिकारों को लेकर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

इस अवसर पर सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायबरेली अमोद कंठ द्वारा जिला कारागार का निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान सचिव ने कारागार की पाकशाला, महिला बैरक, जेल चिकित्सालय, लीगल एड क्लीनिक एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष का अवलोकन किया।
जेल चिकित्सालय में उन्होंने मानसिक रोग से ग्रस्त बंदियों से संवाद कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और उपचार व्यवस्था के संबंध में अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की।
सचिव द्वारा महिला बंदियों को स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रमों में प्रतिभाग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। इसके साथ ही निरीक्षण के दौरान बंदियों से यह भी जानकारी ली गई कि उन्हें विधिक प्रतिनिधित्व के लिए अधिवक्ता उपलब्ध है या नहीं। ऐसे मामलों की भी समीक्षा की गई, जिनमें न्यायालय से जमानत स्वीकृत होने के बावजूद जमानतदार प्रस्तुत न होने के कारण बंदियों की रिहाई नहीं हो सकी है।
निरीक्षण के पश्चात बंदियों को विधिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बंदियों को उनके मौलिक और विधिक अधिकारों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि जो बंदी निजी अधिवक्ता की व्यवस्था करने में सक्षम नहीं हैं, वे जेल परिसर में स्थित लीगल एड क्लीनिक के माध्यम से निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान बंदियों को न्यायिक प्रक्रिया, जमानत से जुड़े प्रावधानों तथा विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई।अधिकारियों ने बंदियों से अपील की कि वे किसी भी विधिक समस्या के समाधान के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करें।
इस अवसर पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम), जेलर हिमांशु रौतेला, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल जय सिंह यादव, जेल चिकित्साधिकारी डॉ. सुनील अग्रवाल, उपकारापाल अंकित गौतम, जनमेजय सिंह एवं सुमैया परवीन सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।


















