दो साल से जर्जर पड़ी दलित बस्ती की सड़क, बरगदहिया के ग्रामीणों ने उठाए विकास कार्यों पर सवाल

  • आईजीआरएस शिकायत के बाद भी नहीं हुई मरम्मत, बरसात में दलदल बन जाती है सड़क, ग्रामीणों ने आंदोलन की दी चेतावनी

सौरभ जायसवाल

महराजगंज। सरकार विकास और गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन ग्राम सौरहा के टोला बरगदहिया दलित बस्ती की सड़क इन दावों की पोल खोल रही है। करीब दो वर्षों से सड़क पूरी तरह जर्जर पड़ी है, मगर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। हालत यह है कि सड़क पर चलना तक दूभर हो गया है और आए दिन राहगीर गिरकर चोटिल हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि एक वर्ष पहले राम सागर यादव और सुधीर यादव ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सड़क निर्माण की मांग की थी, लेकिन सरकारी तंत्र ने केवल कागजी कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। धरातल पर आज तक मरम्मत के नाम पर एक फावड़ा मिट्टी तक नहीं डाली गई।बरसात के मौसम में इस सड़क से गुजरना बेहद कठिन हो जाता है।

विडंबना यह है कि यह सड़क सिर्फ दलित बस्ती तक सीमित नहीं, बल्कि माटिहनवा, हाताबेला हरैया और सिद्धार्थनगर जिले के सरौली गांव को भी जोड़ती है। इसके बावजूद सड़क की बदहाली यह सवाल खड़ा कर रही है कि आखिर विकास योजनाओं का लाभ किन लोगों तक पहुंच रहा है।

बरसात शुरू होते ही सड़क दलदल में तब्दील हो जाती है। स्कूली बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और मरीज जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब गांव की ओर झांकने तक नहीं आ रहे।

क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रतिनिधि सोनू खान, तुफैल अहमद, रामसागर यादव, सुधीर यादव, शाहिद आलम, सहबान अली, शाहबाज, अख्तर हुसैन, अजय, विजय, प्रेम नारायण रॉय और आकाश ने सड़क की बदहाल स्थिति पर आक्रोश व्यक्त करते हुए जल्द निर्माण कराने की मांग की है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ध्यान नहीं दिया तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी।

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