शकील अहमद
लखनऊ। जब आधुनिक चिकित्सा पद्धतियां कई बार सीमाओं तक पहुंच जाती हैं, तब प्राकृतिक और पारंपरिक उपचार विधाएं लोगों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आती हैं।
ऐसी ही एक पद्धति एक्यूप्रेशर है, जो बिना दवाइयों के शरीर की ऊर्जा संतुलन के जरिए उपचार का दावा करती है। राजधानी लखनऊ में इस पद्धति के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है।
आशियाना निवासी एक्यूप्रेशर विशेषज्ञ सी.एल. शर्मा पिछले तीन वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने प्रयागराज स्थित “एक्यूप्रेशर शोध शिक्षण एवं उपचार संस्थान” से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। संस्थान के अध्यक्ष जे.पी. अग्रवाल और कॉर्डिनेटर अमर प्रताप चंद्रवंशी के मार्गदर्शन में उन्होंने इस विधा की बारीकियां सीखी हैं।
सी.एल. शर्मा के अनुसार उनका उपचार केंद्र बंगला बाजार स्थित चंद्रिका मंदिर के पास संचालित है, जहां प्रतिदिन कई लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। उनका दावा है कि इस पद्धति से हजारों मरीजों को लाभ मिला है, खासकर कमर दर्द, घुटनों का दर्द, अस्थमा, कब्ज, अनिद्रा, फैटी लिवर और प्रोस्टेट जैसी समस्याओं में राहत देखने को मिली है।
उन्होंने बताया कि एक्यूप्रेशर का मूल सिद्धांत शरीर की ऊर्जा के संतुलन पर आधारित है। “ट्रीट द एनर्जी, बाय एनर्जी, फॉर एनर्जी” के सिद्धांत पर कार्य करते हुए शरीर में ऊर्जा के असंतुलन को संतुलित कर उपचार किया जाता है।
इस कार्य में उनके साथ अशोक रंजन, राम गोपाल सिंह, श्रवण कुमार और अभिषेक यादव भी जुड़े हैं, जो इस विधा को सीखते हुए सेवा कार्य में सहयोग कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियां आज के समय में एक बेहतर विकल्प बनती जा रही हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि गंभीर बीमारियों में चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है और एक्यूप्रेशर जैसी विधाएं सहायक उपचार के रूप में अधिक उपयोगी हो सकती हैं।


















