आर स्टीफन, स्टेट हेड
छत्तीसगढ़, चिरमिरी। एमसीबी जिले के चिरमिरी तहसील कार्यालय में कार्यरत एक बाबू की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। महिला अधिवक्ता कु. अभिलाषा मनहर ने आरोप लगाया है कि तहसील में पदस्थ “किंडो बाबू” की वजह से गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों को न्याय मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अधिवक्ता अभिलाषा मनहर ने मीडिया के माध्यम से बताया कि जिला न्यायालय बैकुंठपुर द्वारा उन्हें गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए नियुक्त किया गया है, लेकिन पिछले चार महीनों में तहसील से जुड़े मामलों की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। उनका कहना है कि इससे जरूरतमंद लोगों के मामलों में पारदर्शिता प्रभावित हो रही है और वे समय पर सहायता नहीं कर पा रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायालय का समय सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक होता है, लेकिन इसके बावजूद चिरमिरी थाना से लेकर तहसील कार्यालय तक दस्तावेज कार्यालय समय के बाद भेजे जाते हैं। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं और कथित रूप से आर्थिक लेन-देन की आशंका भी जताई जा रही है।
अधिवक्ता ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मजबूरी में उन्हें यह मामला सार्वजनिक करना पड़ा, ताकि शासन-प्रशासन तक वास्तविक स्थिति पहुंच सके।
इस मामले में चिरमिरी न्यायालय के अधिवक्ता समर सिंह ने भी अभिलाषा मनहर के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि उक्त बाबू के आने के बाद से भ्रष्टाचार में वृद्धि हुई है। उन्होंने दावा किया कि कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि संबंधित बाबू की नियुक्ति और कार्यस्थल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, फिर भी वह लगातार कार्यरत हैं, जिससे प्रशासनिक पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
फिलहाल, यह मामला जांच का विषय बना हुआ है और स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है।


















