उन्नाव में 10–28 फरवरी तक चलेगा फ़ाइलेरिया उन्मूलन अभियान, 6 लाख से अधिक लोगों को खिलाई जाएगी दवा

दिनेश विश्वकर्मा

उन्नाव। राष्ट्रीय फ़ाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद उन्नाव के चार विकासखंड सुमेरपुर, गंज मुरादाबाद, बीघापुर एवं पुरवा में 10 से 28 फरवरी 2026 तक सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान संचालित किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत लक्षित आबादी को फ़ाइलेरिया से बचाव के लिए निर्धारित दवाओं का सेवन कराया जाएगा।

अभियान की तैयारियों और उद्देश्यों को लेकर शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) के सहयोग से मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरि नंदन प्रसाद ने बताया कि फ़ाइलेरिया (हाथीपाँव) एक गंभीर, दीर्घकालिक एवं दिव्यांगता उत्पन्न करने वाला मच्छर-जनित रोग है, जो मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है।

उन्होंने कहा कि जनपद के अन्य विकासखंडों में संक्रमण दर में उल्लेखनीय कमी आई है, जिसके कारण वहां इस वर्ष आईडीए अभियान की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लक्षित चारों विकासखंडों के नागरिकों से अपील की कि आशा कार्यकर्ताओं द्वारा दी जाने वाली दवाओं का सेवन बिना किसी हिचक के अवश्य करें।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लिए कम से कम 90 प्रतिशत पात्र आबादी द्वारा दवा सेवन अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि अधिकांश संक्रमित व्यक्ति लक्षणहीन वाहक होते हैं और अनजाने में संक्रमण फैलाते रहते हैं। अभियान का मुख्य संदेश “कोई भी पात्र व्यक्ति न छूटे” रखा गया है।

उन्होंने बताया कि आईडीए अभियान पाँच-स्तम्भीय रणनीति पर आधारित है, जिसमें प्रत्यक्ष निगरानी में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामजीन (डीईसी) एवं एल्बेंडाजोल का सेवन, रुग्णता प्रबंधन एवं रोकथाम, वेक्टर नियंत्रण, अंतर्विभागीय समन्वय तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से रियल-टाइम रिपोर्टिंग शामिल है।

नोडल अधिकारी/अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने जानकारी दी कि यह दवाएं एक वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी पात्र व्यक्तियों को दी जाएंगी। दवा स्वास्थ्यकर्मी की उपस्थिति में ही खिलाई जाएगी तथा खाली पेट दवा नहीं लेने की सलाह दी गई है। दवा सेवन के बाद हल्का चक्कर आना, जी मिचलाना या बुखार जैसे लक्षण सामान्य हैं, जो कुछ समय में स्वतः ठीक हो जाते हैं।

जिला मलेरिया अधिकारी अर्चना मिश्रा ने बताया कि चारों विकासखंडों की लगभग 6,19,518 आबादी को अभियान में शामिल किया जाएगा। इसके लिए 103 सुपरवाइज़र एवं 576 टीमें गठित की गई हैं। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र व्यक्तियों को अपने सामने दवा खिलाएंगी। यदि किसी कारणवश घर पर दवा सेवन संभव न हो, तो आशा कार्यकर्ता के घर को डिपो के रूप में चिन्हित किया गया है। दवाओं एवं आवश्यक लॉजिस्टिक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में जनपद में 3,370 लिंफोडिमा एवं 30 हाइड्रोसील सहित कुल 3,400 फ़ाइलेरिया रोगी पंजीकृत हैं। प्रत्येक बृहस्पतिवार को जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय में फ़ाइलेरिया क्लिनिक संचालित किया जाता है, जहां निःशुल्क जांच एवं परामर्श की सुविधा उपलब्ध है।

फ़ाइलेरिया से बचाव के लिए नागरिकों से घर के आसपास पानी जमा न होने देने, मच्छरदानी के नियमित प्रयोग और लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आशा कार्यकर्ता से संपर्क करने की अपील की गई है। अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 104 पर संपर्क किया जा सकता है।

आईडीए अभियान के सफल संचालन में पाथ, पीसीआई एवं सीफॉर संस्थाओं द्वारा तकनीकी एवं सामुदायिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, मलेरिया इकाई के कर्मचारी, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि, पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म के सदस्य एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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